देहरादून/टिहरी। उत्तराखंड के टिहरी जिले से बैंकिंग व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की कमांद शाखा में करीब 54 लाख रुपये के गबन (Embezzlement) का खुलासा हुआ है। बैंक की Internal Audit में तत्कालीन कैशियर पर खाताधारकों के फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी निकासी वाउचर तैयार कर लाखों रुपये की हेराफेरी करने के आरोप सही पाए गए हैं। मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
Internal Audit में खुला 54 लाख रुपये के गबन का मामला
पुलिस के अनुसार, 30 जून 2026 को उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की कमांद शाखा के शाखा प्रबंधक ने थाना छाम में ई-एफआईआर (E-FIR) दर्ज कराई।
बैंक की इंटरनल ऑडिट और जांच समिति की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया सामने आया कि तत्कालीन कैशियर अभिलाष शर्मा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कई खाताधारकों के खातों से फर्जी हस्ताक्षर (Fake Signatures) और फर्जी निकासी वाउचर (Fake Withdrawal Vouchers) तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर करीब 54 लाख रुपये की रकम अवैध रूप से निकाल ली गई।
अपने और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर की गई रकम
एफआईआर दर्ज होने के बाद थाना छाम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
एसएसपी टिहरी श्वेता चौबे के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने बैंक रिकॉर्ड, खाताधारकों के बैंक स्टेटमेंट, निकासी वाउचर और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच की।
जांच में यह भी सामने आया कि गबन की गई राशि का बड़ा हिस्सा आरोपी ने अपने बैंक खाते के साथ-साथ अपने रिश्तेदारों के खातों में भी ट्रांसफर किया था।
देहरादून से आरोपी कैशियर गिरफ्तार
पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने 2 जुलाई 2026 को देहरादून में दबिश देकर आरोपी अभिलाष शर्मा को उसके आवास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
क्या इस गबन में और लोग भी शामिल हैं?
एसएसपी श्वेता चौबे ने बताया कि अब तक की जांच में अभिलाष शर्मा मुख्य आरोपी पाया गया है। हालांकि पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरे गबन में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
इसके अलावा गबन की गई पूरी राशि के Fund Flow, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और वित्तीय लेन-देन की भी विस्तृत जांच की जा रही है।
एसएसपी श्वेता चौबे का बयान
एसएसपी श्वेता चौबे ने कहा कि बैंक की इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर ई-एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान फर्जी हस्ताक्षर, नकली निकासी वाउचर और खातों में अवैध धन हस्तांतरण के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
टिहरी के कमांद स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में सामने आया यह 54 लाख रुपये का गबन बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस जांच में इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है या नहीं और गबन की पूरी रकम की रिकवरी कैसे की जाती है।















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