देहरादून/उत्तराखंड: उत्तराखंड में पंचायत व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य में ग्राम पंचायतों की सैकड़ों खाली सीटों पर आरक्षण खत्म करने की तैयारी चल रही है। पंचायतीराज निदेशालय ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है, जिससे अब इन सीटों पर सामान्य श्रेणी में चुनाव कराए जा सकेंगे।
3846 ग्राम पंचायत सदस्य पद अब भी खाली
प्रदेश में हाल ही में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और उसके बाद उपचुनाव के बावजूद कई पद खाली रह गए। आंकड़ों के अनुसार:
- ग्राम पंचायत सदस्य: 3846 पद खाली
- ग्राम प्रधान: 16 पद खाली
- क्षेत्र पंचायत सदस्य: 3 पद खाली
इन सीटों पर SC, ST और OBC आरक्षण होने के कारण कई जगह उम्मीदवार ही नहीं मिले, जिससे ये पद लगातार खाली रह गए।
आरक्षण खत्म कर सामान्य सीट बनाने का प्रस्ताव
विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों की सिफारिश पर पंचायतीराज निदेशालय ने फैसला लिया है कि:
- जो सीटें दो बार चुनाव के बाद भी खाली रहीं
- उन पर अब आरक्षण हटाकर सामान्य श्रेणी में बदला जाएगा
- इसके बाद इन सीटों पर तीसरी बार चुनाव कराया जाएगा
हालांकि, महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को इस बदलाव से बाहर रखा जाएगा।
33 ग्राम पंचायतें अब भी अधूरी
राज्य में एक और बड़ी समस्या सामने आई है:
- 33 ग्राम प्रधान चुने जाने के बाद भी शपथ नहीं ले पाए
- वजह: ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या पूरी न होना (कोरम पूरा नहीं)
इस कारण कई पंचायतों का गठन अब तक अधूरा है।
राज्य में पंचायतों की स्थिति
उत्तराखंड में पंचायत ढांचा इस प्रकार है:
- कुल ग्राम पंचायतें: 7817
- क्षेत्र पंचायत सदस्य: 3195 पद
- जिला पंचायत सदस्य: 402 पद
- ग्राम प्रधान: 16 सीट खाली + 33 पंचायतें असंगठित
क्या कहती है सरकार
पंचायतीराज निदेशक निधि यादव के अनुसार:
“खाली पड़े कई पदों को सामान्य किए जाने के लिए जिलाधिकारियों से प्रस्ताव मिला है, जिसे शासन को भेजा गया है। इन सीटों पर तीसरी बार चुनाव कराए जाएंगे।”












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