सरकारी अस्पतालों में अब खेल खत्म! बाहर की दवा लिखने वालों पर गिरेगी गाज

सुबोध उनियाल ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर बड़ा सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को उन्होंने दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय का निरीक्षण किया और साफ संकेत दिए कि सरकारी अस्पतालों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अस्पताल में कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें ऑक्यूपेशनल थेरेपी, हर फ्लोर पर रजिस्ट्रेशन काउंटर, स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक, पैथोलॉजी में आधुनिक मशीनें और एनेस्थीसिया सेक्शन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं का लाभ सीधे मरीजों को मिलना चाहिए।

बाहर की दवा लिखने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई

मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर से दवाइयां लिखना पूरी तरह गलत है। ऐसे डॉक्टरों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज और दवाइयों का लाभ मिलना चाहिए, न कि उन्हें बाहर खर्च करने के लिए मजबूर किया जाए।

निजी अस्पतालों की बढ़ती भीड़ पर चिंता

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकारी अस्पतालों में बेहतर डॉक्टर और मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो फिर मरीज निजी अस्पतालों की ओर क्यों जा रहे हैं। उन्होंने माना कि सरकारी अस्पतालों में साफ-सफाई और मैनेजमेंट सुधारने की जरूरत है, ताकि लोगों का भरोसा मजबूत हो सके।

दून अस्पताल को बनाया जाएगा मॉडल अस्पताल

निरीक्षण के दौरान पार्किंग, एक्सटेंशन और सफाई व्यवस्था को लेकर भी नाराज़गी जताई गई। मंत्री ने निर्देश दिए कि अस्पताल को एक मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किया जाए, जहां मरीजों को बेहतर और सम्मानजनक माहौल मिले।

अच्छे डॉक्टरों की रोस्टर पोस्टिंग की तैयारी

सरकार अब बेहतर डॉक्टरों को रोस्टर सिस्टम के तहत जरूरत वाले क्षेत्रों में भेजने की योजना बना रही है। इससे दूरदराज इलाकों में भी विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

PHC तक पहुंचेगी अल्ट्रासाउंड सुविधा

सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया कि अब प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक अल्ट्रासाउंड सुविधा पहुंचाई जाएगी। इसके लिए रेडियोलॉजिस्ट की कमी को दूर करने के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर निजी संस्थानों का सहयोग भी लिया जाएगा।

सरकार का साफ संदेश है—अब सरकारी अस्पतालों में लापरवाही नहीं चलेगी। अगर निर्देशों का पालन सही तरीके से होता है, तो आने वाले समय में उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

 

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