रुद्रप्रयाग | चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच उत्तराखंड के केदारनाथ धाम जाने वाले पैदल मार्ग पर बड़ा हादसा सामने आया है। शुक्रवार को लिनचोली के पास अचानक थारू ग्लेशियर टूटने से भारी मात्रा में बर्फ और मलबा मार्ग पर आ गया, जिससे करीब 100 मीटर रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद यात्रा मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है।
कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे की है। अचानक ग्लेशियर टूटने से बर्फ और पत्थरों का बड़ा हिस्सा पैदल मार्ग पर गिर गया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय मार्ग पर कोई यात्री मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
तुरंत हरकत में आया प्रशासन
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देश पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की टीम को तुरंत मौके पर भेज दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, राहत एवं पुनर्स्थापन कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है।
पुनर्निर्माण कार्य पर पड़ा असर
इस घटना का असर केदारनाथ धाम में चल रहे दूसरे चरण के पुनर्निर्माण कार्यों पर भी पड़ा है।
- घोड़े-खच्चरों की आवाजाही पूरी तरह बंद
- निर्माण सामग्री और जरूरी सामान की सप्लाई रुकी
- मजदूरों की आवाजाही में भी बाधा
इससे काम की गति फिलहाल धीमी पड़ गई है।
युद्ध स्तर पर रास्ता खोलने की कोशिश
डीडीएमए के अधिशासी अभियंता राघवेंद्र सिंह के अनुसार, टीम मौके पर पहुंच चुकी है और बर्फ व मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द मार्ग को दोबारा चालू किया जाए ताकि यात्रा की तैयारियां प्रभावित न हों।
समय से पहले यात्रा, बढ़ीं मुश्किलें
इस वर्ष चारधाम यात्रा 22 अप्रैल से शुरू होने जा रही है, जो सामान्य वर्षों से करीब 10–15 दिन पहले है।
ऐसे में ऊंचाई वाले इलाकों में अभी भी:
- भारी बर्फबारी
- ग्लेशियर मूवमेंट
- भूस्खलन का खतरा
जारी है, जिससे प्रशासन के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
चारधाम यात्रा से पहले इस तरह की प्राकृतिक घटनाओं ने साफ कर दिया है कि हिमालयी क्षेत्रों में हालात अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है—
यात्रा मार्ग को सुरक्षित बनाना
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना
समय पर सभी व्यवस्थाएं पूरी करना












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