नैनीताल/रामनगर: जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने एक अहम फैसले में रामनगर के ढेला बंदोबस्ती गांव की 1.170 हेक्टेयर भूमि को राज्य सरकार के नाम दर्ज (वेस्ट) करने का आदेश दिया है। यह मामला करीब तीन दशक पुराना (1993) है, जिसमें अवैध तरीके से जमीन का सौदा किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
- यह विवाद वर्ष 1993 से जुड़ा हुआ है।
- कुछ अनुसूचित जाति (SC) के लोगों ने अपनी जाति छुपाकर भूमि का विक्रय कर दिया था।
- भूमि हस्तांतरण कानूनन अवैध पाया गया।
- उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम (और संबंधित प्रावधानों) के तहत SC/ST भूमि की खरीद-बिक्री पर कड़े प्रतिबंध होते हैं।
- न्यायालय ने सौदे को अमान्य घोषित किया।
- अब DM कोर्ट ने कार्रवाई पूरी करते हुए भूमि को राज्य सरकार में निहित (Vest) कर दिया।
क्यों अवैध था यह सौदा?
भारत में SC/ST समुदाय की भूमि की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाए गए हैं।
इनके तहत:
- बिना अनुमति भूमि का हस्तांतरण नहीं हो सकता
- जाति छुपाकर की गई खरीद-बिक्री धोखाधड़ी मानी जाती है
- ऐसे मामलों में जमीन अक्सर सरकार या मूल वर्ग के हित में वापस चली जाती है
यह मामला भी इसी श्रेणी में आता है, जहां नियमों का उल्लंघन साबित हुआ।
प्रशासन की सख्ती का बड़ा संकेत
DM ललित मोहन रयाल के इस फैसले को भू-माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर इस कदम से प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है और यह संदेश गया है कि पुराने मामलों में भी न्याय हो सकता है।
DM रयाल की कार्यशैली बनी चर्चा का विषय
अक्टूबर 2025 के आसपास नैनीताल के जिलाधिकारी बने रयाल की छवि एक एक्टिव और सख्त अधिकारी के रूप में उभर रही है।
उनकी प्रमुख कार्यशैली:
- तहसीलों में औचक निरीक्षण
- फर्जीवाड़े पर तुरंत कार्रवाई
- राजस्व मामलों का तेज निस्तारण
- जनसुनवाई में अधिकारियों की जवाबदेही तय करना
क्या है इस कार्रवाई का असर?
- भू-माफियाओं में खौफ का माहौल
- अवैध जमीन सौदों पर लगाम
- प्रशासन की विश्वसनीयता मजबूत
- SC/ST भूमि संरक्षण कानूनों का कड़ा संदेश
करीब 30 साल पुराने मामले में लिया गया यह फैसला न केवल न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
DM ललित मोहन रयाल की यह कार्रवाई आने वाले समय में अवैध भूमि कारोबार पर बड़ा प्रहार साबित हो सकती है।












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