देहरादून | उत्तराखंड में एक बार फिर नए जिलों के गठन की मांग जोर पकड़ने लगी है। जिला बनाओ संघर्ष समिति ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
विकास और रोजगार के लिए जरूरी बताए नए जिले
समिति के संयोजक प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि राज्य के संतुलित विकास, पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार देने के लिए 11 नए जिलों का गठन बेहद आवश्यक है। उनका कहना है कि वर्तमान जिलों का क्षेत्रफल और प्रशासनिक दायरा इतना बड़ा है कि दूर-दराज के क्षेत्रों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा।
इन क्षेत्रों को बनाने की उठी मांग
समिति द्वारा जिन नए जिलों की मांग उठाई गई है, उनमें प्रमुख रूप से ये क्षेत्र शामिल हैं—
- उत्तरकाशी: पुरोला, नौगांव, मोरी
- टिहरी: नरेंद्र नगर, प्रतापनगर
- पौड़ी: कोटद्वार, बीरोंखाल
- चमोली: गैरसैंण
- नैनीताल: हल्द्वानी, रामनगर
- हरिद्वार: रुड़की
- देहरादून: विकासनगर, चकराता
- अल्मोड़ा: रानीखेत
- पिथौरागढ़: डीडीहाट
- उधमसिंह नगर: काशीपुर, गदरपुर, बाजपुर
दूरस्थ क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी बड़ा मुद्दा
समिति का कहना है कि पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाएं आम जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही हैं। लंबी दूरी और संसाधनों की कमी के कारण लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
नए जिलों से होंगे ये बड़े फायदे
- प्रशासनिक कार्यों में तेजी
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
- स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर
- महिलाओं का सशक्तिकरण
- आपदा प्रबंधन में तेजी
- भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
सरकार से जल्द निर्णय की मांग
समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि नए जिलों के गठन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि सरकार ने इस मुद्दे को नजरअंदाज किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उत्तराखंड में नए जिलों की मांग कोई नई नहीं है, लेकिन इस बार इसे लेकर जनदबाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है—फैसला लेती है या फिर आंदोलन का सामना करना पड़ता है।












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