
देहरादून। देहरादून जिले की डोईवाला तहसील के ग्राम फतेहपुर टांडा स्थित बालाजी एसोसिएट्स स्टोन क्रशर को लेकर सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण और नदी से दूरी के संबंध में अलग-अलग सरकारी रिपोर्टों में दर्ज मापों के अंतर का मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने इन तथ्यों के आधार पर उत्तराखंड शासन से उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सचिन शर्मा और सहायक अभियंता ममता पंवार की संबंधित प्रशासनिक एवं तकनीकी भूमिका की भी जांच कराने का अनुरोध किया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले में सरकारी भूमि की वास्तविक स्थिति, नदी एवं बाढ़ क्षेत्र से स्टोन क्रशर की दूरी और संबंधित विभागों की रिपोर्टों का निष्पक्ष तकनीकी परीक्षण जरूरी है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, दो खसरा नंबर जांच के दायरे में
जेपी बडोनी की शिकायत में जिलाधिकारी देहरादून की 28 मई 2025 की जांच आख्या का हवाला दिया गया है। इसमें ग्राम फतेहपुर टांडा स्थित खसरा संख्या 242, जिसका रकबा 0.1620 हेक्टेयर बताया गया है, का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, राजस्व अभिलेखों में इस भूमि को नदी की भूमि के रूप में दर्ज बताया गया है। आरोप है कि यह जमीन स्टोन क्रशर की चारदीवारी के भीतर स्थित है।

शिकायत में संबंधित आख्या के हवाले से क्रशर के डग से इस भूमि की दूरी लगभग 70 मीटर बताए जाने का भी उल्लेख है। इस दावे की पुष्टि के लिए मूल राजस्व अभिलेखों और प्रमाणित सीमांकन के आधार पर जांच कराने की मांग की गई है।
इसके अलावा, खाता संख्या 822 के अंतर्गत खसरा संख्या 239, रकबा 0.0810 हेक्टेयर भूमि को उत्तर प्रदेश सरकार की बंजर भूमि बताया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह भूमि भी स्टोन क्रशर की चारदीवारी के भीतर है और यहां रेत-बजरी का भंडारण किए जाने की आशंका है।
शिकायतकर्ता ने राजस्व, सिंचाई और खनन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर दोनों भूमि खंडों का सीमांकन कराने तथा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
नदी से दूरी को लेकर दो रिपोर्टों में अंतर, तकनीकी जांच की मांग
इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल नदी और बाढ़ क्षेत्र से स्टोन क्रशर की दूरी को लेकर उठाया गया है। शिकायत में सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता की 20 अगस्त 2026 की रिपोर्ट का उल्लेख है, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में मूल आवेदन संख्या 780/2024 से संबंधित बताई गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस रिपोर्ट में स्टोन क्रशर की 1-in-100-year बाढ़ आवृत्ति रेखा से दूरी लगभग 10 मीटर और 1-in-5-year बाढ़ आवृत्ति रेखा से दूरी लगभग 202 मीटर दर्ज होने का उल्लेख है।
वहीं, जेपी बडोनी के अनुसार, सिंचाई विभाग की 24 अक्टूबर 2026 की दूरी संबंधी रिपोर्ट में स्टोन क्रशर से नदी तक की दूरी 500 मीटर से अधिक दर्शाई गई है।
इन अलग-अलग मापों को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं और दोनों रिपोर्टों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन दूरियों के संदर्भ बिंदु समान हैं या अलग-अलग, इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना आवश्यक है। नदी की वर्तमान जलधारा, राजस्व सीमा, उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) और बाढ़ आवृत्ति रेखाएं अलग-अलग तकनीकी संदर्भ हो सकते हैं।
ऐसे में दोनों रिपोर्टों के मूल दस्तावेज, सर्वेक्षण नक्शे, GPS निर्देशांक और मापन पद्धति का तुलनात्मक परीक्षण कराकर अंतर की वास्तविक वजह स्पष्ट करने की मांग की गई है।
ADM स्मृता परमार की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध
शिकायतकर्ता जेपी बडोनी ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार की संबंधित निरीक्षण प्रक्रिया, रिपोर्टों और प्रशासनिक कार्यवाही में भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि पूर्व जांच आख्या, राजस्व अभिलेखों और सिंचाई विभाग की रिपोर्टों का समग्र परीक्षण किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रशासनिक निर्णय लेते समय सभी प्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया गया था या नहीं।
उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि यदि जांच प्रक्रिया में हितों के टकराव की कोई वास्तविक आशंका सामने आती है, तो शासन स्तर से किसी स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी देने पर विचार किया जाए।
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि किसी अधिकारी की जिम्मेदारी का निर्धारण आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि मूल अभिलेखों और निष्पक्ष जांच के निष्कर्षों के आधार पर होना चाहिए।
सचिन शर्मा और ममता पंवार की रिपोर्ट की तकनीकी वैधता पर सवाल
शिकायत में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सचिन शर्मा और सहायक अभियंता ममता पंवार की ओर से तैयार या प्रस्तुत दूरी संबंधी रिपोर्ट की मापन प्रक्रिया और तकनीकी आधार की जांच कराने की मांग भी की गई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि रिपोर्ट तैयार करते समय किन स्थानों को प्रारंभिक और अंतिम संदर्भ बिंदु माना गया, स्थल निरीक्षण किस पद्धति से किया गया और बाढ़ क्षेत्र से संबंधित कौन-से तकनीकी दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, यह स्पष्ट होना चाहिए।
जांच में निम्न बिंदुओं को शामिल करने का अनुरोध किया गया है:
- दोनों रिपोर्टों में दूरी मापने के प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं का सत्यापन।
- स्थल निरीक्षण की तारीख, अधिकारियों के नाम और निरीक्षण टिप्पणियों की जांच।
- राजस्व एवं सर्वेक्षण नक्शों, GPS निर्देशांकों और मूल मापन पत्रकों का परीक्षण।
- नदी की सीमा, उच्चतम बाढ़ स्तर और बाढ़ आवृत्ति रेखाओं के तकनीकी आधार की पुष्टि।
- स्टोन क्रशर पर लागू नीति और पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की समीक्षा।
- दोनों रिपोर्टों में दर्ज दूरियों के अंतर का कारण स्पष्ट करना।
जेपी बडोनी ने मांग की है कि यदि स्वतंत्र जांच में जानबूझकर गलत रिपोर्ट तैयार करने, महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने या नियमों की अनदेखी करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
संयुक्त सीमांकन और स्वतंत्र सर्वेक्षण कराने की मांग
शिकायतकर्ता ने शासन से राजस्व, सिंचाई और खनन विभाग के सक्षम अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर मौके का स्वतंत्र तकनीकी सर्वेक्षण कराने का अनुरोध किया है।
इस सर्वेक्षण में स्टोन क्रशर की चारदीवारी, क्रशर के डग, खसरा संख्या 242 की कथित नदी भूमि, खसरा संख्या 239 की कथित सरकारी बंजर भूमि और संबंधित नदी एवं बाढ़ क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही संबंधित विभागों की मूल रिपोर्टों, निरीक्षण टिप्पणियों, राजस्व नक्शों, मापन पत्रकों, GPS निर्देशांकों और स्थल से संबंधित फोटो-वीडियो अभिलेखों को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है, ताकि जांच के दौरान तथ्यों का प्रमाणिक परीक्षण किया जा सके।
स्टोन क्रशर की अनुमति और पर्यावरणीय नियमों की भी हो समीक्षा
जेपी बडोनी ने बालाजी एसोसिएट्स स्टोन क्रशर की स्थापना और संचालन से संबंधित अनुमतियों, अनापत्ति प्रमाणपत्रों, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी शर्तों तथा नदी एवं बाढ़ क्षेत्र से जुड़े लागू नियमों के अनुपालन की समीक्षा कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, यदि किसी विवादित रिपोर्ट के आधार पर स्टोन क्रशर के संचालन या अनुमति से संबंधित निर्णय लिया गया है, तो सक्षम प्राधिकारी को लागू कानून के तहत उसकी समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने शासन से जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने और शिकायत पर की गई कार्यवाही का लिखित विवरण उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।
“सरकारी भूमि की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से समझौता नहीं होना चाहिए”
सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने कहा कि सरकारी भूमि की सुरक्षा, नदियों के प्राकृतिक प्रवाह का संरक्षण, बाढ़ जोखिम का सही आकलन और प्रशासनिक पारदर्शिता जनहित के महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि बालाजी एसोसिएट्स स्टोन क्रशर से संबंधित सरकारी अभिलेखों में सामने आए कथित अंतर की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि बिना निष्पक्ष जांच किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं है, लेकिन यदि जांच में गंभीर अनियमितता या जानबूझकर गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि सरकारी भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और नदी एवं बाढ़ क्षेत्र से दूरी को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में दर्ज मापों के अंतर की वजह क्या है। इन सवालों का स्पष्ट जवाब स्वतंत्र सीमांकन, तकनीकी सर्वेक्षण और संबंधित अभिलेखों की जांच से ही सामने आ सकेगा।












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