मोरी, उत्तरकाशी | उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के देवजानी और कुमणाई गांवों में पेयजल संकट ने जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से हर घर तक नल से जल पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आज भी अपनी जरूरत का पानी लेने के लिए दूर-दराज स्थित प्राकृतिक जलस्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में पर्याप्त और नियमित पेयजल उपलब्ध नहीं होने के कारण महिलाओं और बच्चों को रोजाना पानी ढोने के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
कागजों में काम पूरा, लेकिन धरातल पर सुविधा नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि हर घर नल-जल योजना के तहत कागजों में कार्य पूरा होने या प्रगति पर होने की स्थिति दर्शाई गई है, लेकिन धरातल पर अपेक्षित पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों को पेयजल समस्या से अवगत कराया, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को करना पड़ रहा संघर्ष
गांव में पेयजल व्यवस्था सुचारु नहीं होने का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलकर प्राकृतिक जलस्रोतों से पानी लाना पड़ता है।
गर्मी के दौरान जब प्राकृतिक जलस्रोतों में पानी का स्तर कम हो जाता है, तब समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे में ग्रामीणों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए पानी जुटाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने उठाए जल जीवन मिशन की कार्यप्रणाली पर सवाल
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि Jal Jeevan Mission के तहत गांवों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है, तो फिर उन्हें आज भी दूर से पानी क्यों लाना पड़ रहा है?
ग्रामीणों ने योजना के तहत स्वीकृत धनराशि, कराए गए निर्माण कार्य, पाइपलाइन और कनेक्शन की स्थिति तथा वास्तविक लाभार्थियों की स्थलीय जांच (Ground Verification) कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि योजना का कार्य अधूरा है तो उसे जल्द पूरा किया जाए। वहीं, यदि सरकारी अभिलेखों में कार्य पूर्ण दर्शाया गया है, तो मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और आवश्यकता पड़ने पर जिम्मेदारी तय की जाए।
कई बार शिकायत के बाद भी नहीं मिला स्थायी समाधान
देवजानी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल समस्या को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद घरों तक नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पाई है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि दोनों गांवों में जल जीवन मिशन के तहत हुए कार्यों का निष्पक्ष निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण और स्थलीय सत्यापन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजना का काम निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं।
बड़ा सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?
देवजानी और कुमणाई गांवों में सामने आई पेयजल समस्या ने योजना की Monitoring और Implementation System पर भी सवाल खड़े किए हैं।
यदि योजना का कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा हो चुका है, तो ग्रामीणों को नियमित पानी क्यों नहीं मिल रहा? और यदि कार्य अभी अधूरा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है—कार्यदायी संस्था, संबंधित ठेकेदार या निगरानी करने वाले विभागीय अधिकारियों की?
ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए और जल्द से जल्द दोनों गांवों के प्रत्येक परिवार को नियमित और पर्याप्त पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
विभागीय पक्ष का इंतजार
इस संबंध में विभागीय अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका और अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया। विभागीय पक्ष प्राप्त होने पर उसे खबर में शामिल किया जाएगा।













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