देहरादून: Rajaji Tiger Reserve में वन गुर्जरों के विस्थापन और भूमि आवंटन के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में करीब 350 संदिग्ध प्रकरण सामने आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये कीमत की वन भूमि गलत तरीके से आवंटित की गई, जबकि कुछ मामलों में जमीन बेचने और किराये पर देने तक की शिकायतें मिली हैं।
जानकारी के मुताबिक राजाजी टाइगर रिजर्व और कालागढ़ टाइगर रिजर्व से विस्थापित किए गए वन गुर्जरों को हरिद्वार जिले के गैंडीखाता और पथरी क्षेत्र में बसाया गया था। सरकार की ओर से प्रत्येक परिवार को 8200 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई थी। इसमें 8000 वर्ग मीटर जमीन पशुओं के चारे के लिए और 200 वर्ग मीटर जमीन आवासीय उपयोग के लिए दी गई थी।
हिमाचल के वन गुर्जर को भी मिला आवंटन
मामले में बड़ा खुलासा तब हुआ जब हिमाचल प्रदेश के एक वन गुर्जर को भी गैंडीखाता रेंज में जमीन आवंटित किए जाने की बात सामने आई। सूत्रों के अनुसार कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से अलग-अलग पहचान पत्र बनाकर भूमि आवंटन का लाभ लिया।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में विस्थापन के नाम पर मिली जमीन को दूसरे लोगों को बेच दिया गया, जबकि नियमानुसार वन विभाग की भूमि की खरीद-फरोख्त नहीं की जा सकती।
किराये पर दी जमीन, जंगलों में ही रह रहे कुछ परिवार
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ वन गुर्जरों ने आवंटित जमीन को किराये पर दे दिया और खुद हरिद्वार के जंगलों तथा गंगा किनारे रह रहे हैं। इससे पूरे विस्थापन और पुनर्वास प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पहले की जांच में भी सामने आए थे 350 मामले
बताया जा रहा है कि इससे पहले आईएफएस अधिकारी Meenakshi Joshi की जांच में भी 350 वन गुर्जरों को गलत तरीके से वन भूमि आवंटित करने का मामला सामने आया था। हालांकि उस जांच के बाद भी अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
निदेशक कोको रोसे ने दिए जांच के निर्देश
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक Koko Rose ने बताया कि मामले की शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत के आधार पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग अब सभी आवंटनों के दस्तावेजों और पहचान पत्रों की दोबारा जांच करने की तैयारी में है।












Leave a Reply