परीक्षार्थी नहीं, बाहर बैठा शख्स दे रहा था जवाब! SSC परीक्षा घोटाले से हड़कंप

देशभर में आयोजित होने वाली एसएससी ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तराखंड STF की जांच में ऐसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं, जिन्होंने ऑनलाइन परीक्षा सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है।

एसएससी ऑनलाइन परीक्षा में नकल के मामले की जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच चुकी है। STF द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि देशभर की सैकड़ों लैब में सेटअप के दौरान ही ऐसी तकनीकी गड़बड़ियां की गईं, जिनकी मदद से आसानी से नकल कराई जा सकती थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस पूरे खेल में परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी के कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत हो सकती है।

500 से ज्यादा लैब बनाए जाने का दावा

जांच में पकड़े गए आरोपी ईश्वरी प्रसाद ने STF के सामने कई बड़े खुलासे किए हैं। आरोपी ने बताया कि वर्ष 2024 में योगेश उर्फ योगी उर्फ इंद्रजीत उर्फ जैक के कहने पर उसने लैब सेटअप करने का काम शुरू किया था। बदले में उसे होने वाले मुनाफे में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी का लालच दिया गया था।

इसके बाद उसने “महादेव डिजिटल जोन” नाम से लैब स्थापित की। इसी लैब में फरवरी महीने में गड़बड़ी सामने आने के बाद STF ने कार्रवाई शुरू की थी। मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और सभी की अलग-अलग भूमिकाएं सामने आई हैं।

आरोपी ने पूछताछ में यह भी बताया कि उसने उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी, राजस्थान, हैदराबाद और हिमाचल समेत कई राज्यों में 500 से ज्यादा लैब स्थापित की थीं। हालांकि, इनमें से चुनिंदा लैब में ही कथित सेटिंग की गई थी। STF को आशंका है कि ऐसी लैब की संख्या 100 से अधिक हो सकती है।

सेटअप के वक्त ही की जाती थी गड़बड़ी

जांच के अनुसार, लैब सेटअप के दौरान ही पूरे सिस्टम में ऐसी तकनीकी सेटिंग कर दी जाती थी, जिससे नकल माफिया आसानी से सिस्टम को अपने कंट्रोल में ले सके। इथरनेट केबल को यूपीएस सर्वर रूम के विशेष चेंबर से जोड़ा जाता था, जिसके जरिए बाहरी लोग परीक्षा सिस्टम तक पहुंच बना लेते थे।

बताया जा रहा है कि परीक्षार्थी सिर्फ स्क्रीन पर प्रश्न देखता था, जबकि उत्तर कहीं और से दर्ज किए जाते थे। नकल गिरोह के सदस्य रिमोट एक्सेस के जरिए पूरे कंप्यूटर सिस्टम को कंट्रोल करते थे और बाहर बैठा व्यक्ति सीधे उत्तर भरता था।

CCTV सिस्टम भी था गिरोह के नियंत्रण में

STF जांच में यह भी सामने आया है कि सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम ही नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्रों के CCTV कैमरों की लाइव फीड भी गिरोह के कब्जे में रहती थी। इसके लिए CCTV सर्वर की केबल को भी सर्वर रूम के चेंबर तक पहुंचाया जाता था।

इससे गिरोह जरूरत पड़ने पर किसी कैमरे को बंद कर देता था या उसकी फीड में तकनीकी गड़बड़ी कर देता था, ताकि गतिविधियां रिकॉर्ड न हो सकें।

एक परीक्षा केंद्र कराया गया बंद

आगामी परीक्षाओं में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने एक संदिग्ध परीक्षा केंद्र को बंद भी करा दिया है। STF अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है।

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