उत्तराखंड सरकार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, IPS अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई से इनकार

High court news: उत्तराखंड की नौकरशाही और पुलिस महकमे में लंबे समय से चर्चा का विषय बने वरिष्ठ IPS अधिकारियों के प्रतिनियुक्ति विवाद में राज्य सरकार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह सेवा संबंधी विवाद (Service Matter) है और इसकी सुनवाई का उपयुक्त मंच केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) है। अदालत ने याचिकाकर्ता अधिकारियों को CAT का रुख करने की सलाह देते हुए याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। साथ ही अवमानना से जुड़ी कार्यवाही भी खारिज कर दी गई।

क्या है पूरा मामला?

मामला केंद्र सरकार द्वारा जारी प्रतिनियुक्ति आदेशों से जुड़ा है। आदेश के तहत वरिष्ठ IPS अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने तथा अरुण मोहन जोशी को DIG पद पर नियुक्त किए जाने के निर्देश जारी किए गए थे। दोनों अधिकारियों ने इन आदेशों को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिका में अधिकारियों की ओर से कहा गया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है। साथ ही जिन पदों पर उनकी तैनाती की जा रही है, वे उनके वर्तमान रैंक और वरिष्ठता के अनुरूप नहीं हैं। अधिकारियों ने प्रतिनियुक्ति आदेशों को सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए अदालत से राहत की मांग की थी।

राज्य सरकार ने अदालत में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में यह पक्ष मजबूती से रखा गया कि मामला पूरी तरह सेवा विवाद से संबंधित है और ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) को है। सरकार ने कहा कि हाईकोर्ट में सीधे हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती।

अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए अधिकारियों को CAT जाने का निर्देश दिया और मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

सरकार के लिए क्यों अहम माना जा रहा फैसला?

कानूनी जानकारों के अनुसार यह फैसला राज्य सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी सफलता माना जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार ने मामले में विधिक रूप से मजबूत तैयारी की थी और अदालत को अपने पक्ष से संतुष्ट करने में सफल रही।

फैसले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में इस मामले की सुनवाई और भी अहम हो सकती है, जहां प्रतिनियुक्ति आदेशों की वैधता, सेवा शर्तों और अधिकारियों की आपत्तियों पर विस्तार से बहस होगी।

आगे क्या?

फिलहाल हाईकोर्ट के रुख के बाद राज्य सरकार ने राहत की सांस ली है, जबकि दोनों अधिकारियों के सामने अब CAT में अपनी कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की चुनौती होगी। पूरे घटनाक्रम पर पुलिस और प्रशासनिक महकमे की नजरें टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!