नौगांव (उत्तरकाशी) । रवाईं घाटी के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और कृषि उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नौगांव कृषि मंडी समिति का संचालन निर्माण पूरा होने के एक वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। मंडी भवन और अन्य सुविधाएं तैयार होने के बावजूद इसके शुरू न होने से क्षेत्र के किसानों और काश्तकारों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
16 दुकानें तैयार, फिर भी नहीं हुआ आवंटन
मंडी परिसर में फल एवं सब्जियों के भंडारण, खरीद-बिक्री और विपणन के लिए बनाई गई 16 दुकानें अभी तक आवंटन की प्रतीक्षा में हैं। किसानों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा हुए करीब एक साल बीत चुका है, लेकिन मंडी संचालन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय काश्तकारों का मानना है कि यदि मंडी समय पर शुरू हो जाती तो उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बाहरी बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ जाती।
नगदी फसलों का प्रमुख केंद्र है रवाईं घाटी
उत्तरकाशी जिले के नौगांव, पुरोला और मोरी विकासखंड प्रदेश के महत्वपूर्ण नगदी फसल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां बड़ी मात्रा में टमाटर, मटर, फ्रेंचबीन, शिमला मिर्च, आलू, नाशपाती और सेब का उत्पादन किया जाता है।
स्थानीय मंडी की सुविधा नहीं होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए देहरादून, विकासनगर और अन्य बाहरी मंडियों का रुख करना पड़ता है। इससे परिवहन लागत बढ़ने के साथ-साथ किसानों को कई बार उनकी उपज का उचित बाजार मूल्य भी नहीं मिल पाता।
2017 में मिली थी मंडी की सौगात
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रवाईं घाटी को कृषि मंडी समिति की सौगात दी थी। हालांकि परियोजना को धरातल पर उतरने और भवन निर्माण पूरा होने में लगभग एक दशक का समय लग गया।
अब जब मंडी भवन पूरी तरह तैयार है, तब भी इसका संचालन शुरू न होना किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
क्षेत्र के काश्तकारों का कहना है कि सरकार और प्रशासन में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कई जिम्मेदार पदाधिकारी होने के बावजूद मंडी संचालन को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
किसानों का आरोप है कि यदि जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रभावी पैरवी की जाती तो मंडी का संचालन अब तक शुरू हो चुका होता और किसानों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाता।
टमाटर और सेब सीजन से पहले मंडी शुरू करने की मांग
देवराना घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा ने कहा कि मंडी का निर्माण पूरा होने के बावजूद उसका संचालन शुरू न होना किसानों के हितों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि जून-जुलाई में क्षेत्र में टमाटर और सेब का सीजन शुरू हो जाता है। ऐसे में सरकार को किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द दुकान आवंटन प्रक्रिया पूरी कर मंडी को संचालित करना चाहिए, ताकि इस सीजन में किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके।
किसानों ने दी जल्द कार्रवाई की चेतावनी
क्षेत्र के किसानों ने प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि मंडी की दुकानों का आवंटन तत्काल किया जाए और कृषि मंडी समिति को जल्द से जल्द शुरू किया जाए।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते मंडी चालू नहीं हुई तो उन्हें एक बार फिर अपनी मेहनत की उपज औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
रवाईं घाटी के किसानों के लिए नौगांव कृषि मंडी एक बड़ी उम्मीद के रूप में देखी जा रही थी। लेकिन निर्माण पूरा होने के बावजूद संचालन में हो रही देरी अब किसानों के लिए चिंता और नाराजगी का कारण बन चुकी है। टमाटर और सेब सीजन नजदीक होने के बीच सभी की निगाहें अब सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।












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