उत्तरकाशी। भारत-चीन सीमा से सटे उत्तरकाशी जिले के सीमांत एवं दुर्गम क्षेत्रों में चल रही रक्षा परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में सेना को विभिन्न रक्षा परियोजनाओं के लिए हस्तांतरित की जाने वाली वन भूमि से संबंधित लंबित प्रस्तावों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में राजस्व विभाग, वन विभाग तथा भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। जिलाधिकारी ने प्रत्येक प्रस्ताव की स्थिति का बारीकी से अवलोकन करते हुए कहा कि सीमांत क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने तथा वन भूमि स्वीकृति (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) से जुड़ी तकनीकी एवं प्रशासनिक बाधाओं को शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि रक्षा परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित नहीं है।
स्थलीय निरीक्षण जल्द पूरा करने के निर्देश
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सेना की चौकियों, संपर्क मार्गों एवं अन्य रणनीतिक परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित भूमि का स्थलीय निरीक्षण जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को वन संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आने वाले मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।
साथ ही प्रतिपूरक वनीकरण (कम्पेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन) के लिए आवश्यक भूमि को राजस्व विभाग के सहयोग से तत्काल चिन्हित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि स्वीकृति प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
सीमाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : डीएम
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और सीमांत क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक आवश्यक सुविधाएं एवं बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रक्षा परियोजनाओं से जुड़े सभी मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास को गति मिले और राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूती प्रदान की जा सके।












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