नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वसूली प्रक्रिया के दौरान अधिग्रहित की गई अचल संपत्तियों (Recovered Properties) को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब कोई भी बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) या नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) वसूली के दौरान कब्जे में आई प्रॉपर्टी को उसी डिफॉल्टर या उससे जुड़े किसी संबंधित पक्ष (Related Party) को दोबारा नहीं बेच सकेगी।
आरबीआई का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और डिफॉल्ट के मामलों में संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना है।
किन परिस्थितियों में बैंक प्रॉपर्टी का अधिग्रहण कर सकते हैं?
RBI के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में बैंकों का काम अचल संपत्ति का कारोबार करना नहीं है। हालांकि, यदि किसी उधारकर्ता का लोन Non-Performing Asset (NPA) घोषित हो जाता है और कानूनी प्रक्रिया के तहत वसूली की जाती है, तो बैंक सुरक्षा (Collateral) के रूप में रखी गई संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त कर सकते हैं।
डिफॉल्टर को वापस नहीं बेची जा सकेगी संपत्ति
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंक द्वारा वसूली गई संपत्ति को किसी भी स्थिति में उसी डिफॉल्टर या उसके संबंधित पक्षों को वापस नहीं बेचा जा सकेगा। इससे ऐसी संपत्तियों की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
7 साल के भीतर करना होगा निपटान
RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंकों को वसूली गई गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों (SNFAs) का निपटान अपनी बोर्ड-अनुमोदित नीति के अनुसार अधिकतम 7 वर्षों के भीतर करना होगा।
बैंकों को इन संपत्तियों की बिक्री के लिए सार्वजनिक नीलामी (Public Auction) को प्राथमिकता देनी होगी ताकि अधिकतम मूल्य प्राप्त किया जा सके और वसूली प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।
बोर्ड-अप्रूव्ड पॉलिसी बनाना होगा अनिवार्य
RBI ने सभी बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और NBFCs को निर्देश दिया है कि वे SNFAs के अधिग्रहण और निपटान के लिए Board Approved Policy तैयार करें।
इस नीति में निम्न बिंदु शामिल होंगे—
- कुल परिसंपत्तियों में SNFA की अधिकतम सीमा।
- अधिग्रहण से पहले किए जाने वाले वसूली प्रयास।
- पात्रता मानदंड।
- अधिकतम 7 वर्ष में संपत्ति के निपटान की समय-सीमा।
- बिक्री और नीलामी की प्रक्रिया।
आंशिक निपटान पर क्या होगा?
यदि किसी संपत्ति के माध्यम से लोन का केवल आंशिक भुगतान होता है, तो बची हुई राशि को Restructured Loan माना जाएगा और उस पर RBI के पुनर्गठित ऋण संबंधी नियम लागू होंगे।
30 सितंबर 2027 तक करना होगा अनुपालन
RBI के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक बैंकों के पास मौजूद SNFAs को 30 सितंबर 2027 तक नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप लाना होगा।
साथ ही, इन परिसंपत्तियों को अब Gross NPA, Net NPA, Stressed Loans या Provision Coverage Ratio का हिस्सा नहीं माना जाएगा। इन्हें बैंकों की बैलेंस शीट में अलग श्रेणी (Separate Head) के तहत प्रदर्शित किया जाएगा।
RBI के नए नियम से क्या होगा फायदा?
- डिफॉल्टर द्वारा संपत्ति दोबारा हासिल करने पर रोक लगेगी।
- वसूली प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
- सार्वजनिक नीलामी को बढ़ावा मिलेगा।
- बैंकिंग व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी।
- NPA प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा।












Leave a Reply