बड़ी खबर : पाग पहनाकर संसद में कराया प्रवेश, धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद भवन पहुंचने पर सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने मकर द्वार पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान सांसदों ने उन्हें पारंपरिक पाग (पगड़ी) पहनाई और पूरे सम्मान के साथ सदन के भीतर लेकर गए। इसे राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

मकर द्वार पर हुआ भव्य स्वागत

शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। उनके पहुंचते ही एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत किया और सम्मान स्वरूप पाग पहनाकर सदन तक साथ लेकर गए। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को पार्टी द्वारा उनके प्रति समर्थन और विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

सरकार की ओर से समर्थन का संदेश

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस स्वागत के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा किसी दबाव का परिणाम नहीं था, बल्कि उन्होंने छात्रों और देशहित को प्राथमिकता देते हुए स्वेच्छा से यह निर्णय लिया। साथ ही, सरकार और संगठन उनके इस फैसले के साथ मजबूती से खड़े हैं।

इस्तीफे के बाद वरिष्ठ नेताओं ने की थी मुलाकात

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पीयूष गोयल, जेपी नड्डा, निर्मला सीतारमण, जितेंद्र सिंह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके आवास पर पहुंचकर मुलाकात की थी। नेताओं ने उनके इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था, लेकिन यह भी स्पष्ट किया था कि उन्होंने यह फैसला स्वयं लिया है।

युवाओं के नाम पत्र में कही थी यह बात

इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं के नाम एक पत्र जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि छात्रों के आंदोलनों का राष्ट्रविरोधी ताकतें गलत फायदा न उठाएं, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि नीट पेपर लीक मामले की जिम्मेदारी उन्होंने शुरू से स्वीकार की थी और मामले में आवश्यक कदम उठाए गए। उनके अनुसार, नीट परीक्षा दोबारा कराई गई और परिणाम भी जल्द घोषित किए गए।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

संसद परिसर में हुए इस स्वागत को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ इसे पार्टी द्वारा समर्थन का सार्वजनिक प्रदर्शन मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक संदेश देने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। वहीं विपक्ष भी संसद परिसर में अपनी रणनीति बनाने में जुटा नजर आया।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!