नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें अधिवेशन में भारत को सिंधु नदी के पानी को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रुख मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान ‘युद्ध की कार्रवाई’ (Act of War) मानेगा।
शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि सिंधु नदी का पानी केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जीवनरेखा है। उन्होंने भारत के उस रुख पर भी सवाल उठाया, जिसके तहत सिंधु जल संधि से जुड़े कदमों को लेकर विवाद बना हुआ है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत के दावों और कदमों को संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों तथा कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने भी स्वीकार नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि पानी का इस्तेमाल कभी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। नदियों को देशों की समृद्धि का माध्यम बनना चाहिए, न कि उन्हें विभाजित करने का जरिया।
कश्मीर का मुद्दा भी उठाया
संयुक्त राष्ट्र महासभा के संबोधन के दौरान शहबाज़ शरीफ़ ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों को राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा।
शहबाज़ ने कहा कि जब तक कश्मीरियों को अपनी इच्छा के अनुसार भविष्य तय करने का अधिकार नहीं मिलता, तब तक पाकिस्तान उनका समर्थन जारी रखेगा। उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की ‘जुगुलर वेन’ यानी गले की नस बताते हुए कहा कि यह उसके लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा।
भारत का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने आरएसएस से प्रभावित विचारधारा पर धार्मिक नफरत को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने भीड़ की हिंसा, सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमलों और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। ये आरोप पाकिस्तान की ओर से लगाए गए हैं।
होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर ईरान का बड़ा प्रस्ताव
इसी बीच ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज़ स्ट्रेट को दोबारा खोलने को लेकर एक प्रस्ताव रखा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि यदि अमेरिका प्रस्ताव में शामिल आवश्यक शर्तों को पूरा करता है तो एक सप्ताह के भीतर होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
अराग़ची ने हालांकि इन शर्तों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया। उन्होंने कहा कि इनका उल्लेख जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन यानी एमओयू में पहले ही किया जा चुका है।
ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक, प्रस्ताव कतर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब आगे का फैसला अमेरिका को करना है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी
ईरान के प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी पक्ष की ओर से भी संकेत दिया गया है कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए सकारात्मक बातचीत चल रही है। इन बातचीत में परमाणु मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं।
जून के एमओयू में क्या था?
अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हुए 14 सूत्री समझौता ज्ञापन का उद्देश्य संघर्षविराम लागू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को आंशिक रूप से खोलना बताया गया था।
इस समझौते में ईरान के परमाणु हथियार हासिल नहीं करने से जुड़ी शर्त शामिल थी। इसके साथ ही अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगियों की ओर से विभिन्न मोर्चों पर सैन्य अभियान समाप्त करने का प्रावधान भी बताया गया था।
एमओयू में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करने और ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत से जुड़े प्रावधान भी शामिल थे।
सिंधु नदी के पानी को लेकर पाकिस्तान की चेतावनी और होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर ईरान के नए प्रस्ताव के बीच अमेरिका, भारत, पाकिस्तान और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।














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