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उत्तराखंड से राज्यसभा पहुंचे दिनेश आर्य, अब संसद में बुलंद होगी प्रदेश की आवाज?

देहरादून: उत्तराखंड से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार दिनेश आर्य निर्विरोध राज्यसभा सांसद निर्वाचित हो गए हैं। उनके निर्विरोध निर्वाचन पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बधाई देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि दिनेश आर्य अपने राजनीतिक और सांगठनिक अनुभव के आधार पर संसद के उच्च सदन में उत्तराखंड के विकास, जनहित और समाज के कमजोर एवं पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दिनेश आर्य के निर्वाचन को संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, समर्पण और जनसेवा के भाव का परिणाम बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि आर्य का अनुभव और आम लोगों से जुड़े विषयों की समझ संसद में उत्तराखंड के हितों को प्रभावी ढंग से रखने में सहायक होगी।

महेंद्र भट्ट ने कहा कि राज्यसभा प्रदेश की विकास संबंधी प्राथमिकताओं और जनहित के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में दिनेश आर्य के प्रतिनिधित्व से उत्तराखंड से जुड़े विषयों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। उन्होंने विश्वास जताया कि आर्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में योगदान देंगे।

भाजपा प्रदेश नेतृत्व और कार्यकर्ताओं ने भी दिनेश आर्य के निर्विरोध निर्वाचन पर प्रसन्नता जताई। पार्टी को उम्मीद है कि वह प्रदेश के विकास, जनकल्याण और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के हितों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देते हुए संसद में उत्तराखंड की आवाज बुलंद करेंगे।

दिनेश आर्य का राजनीतिक सफर: संघ से विद्यार्थी परिषद तक

दिनेश आर्य का सामाजिक और राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 1982 में लखीमपुर खीरी, 1983 में बरेली और 1996 में नागपुर में संघ का तृतीय वर्ष प्रशिक्षण प्राप्त किया।

वर्ष 1985 में उन्होंने नैनीताल में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में सदस्यता ग्रहण की। इसके बाद वर्ष 1986 में उन्हें विद्यार्थी परिषद का नैनीताल जिला संयोजक नियुक्त किया गया। उन्होंने वर्ष 1988 तक इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया।

सांगठनिक गतिविधियों से शुरू हुआ उनका यह सफर अब राज्यसभा तक पहुंचा है। उनके निर्वाचन के बाद भाजपा को उम्मीद है कि संगठन में अर्जित उनका अनुभव प्रदेश से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में उपयोगी साबित होगा।

 

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