अभिजीत दिपके पर बढ़ीं मुश्किलें? संपत्ति और फंडिंग की जांच की मांग ने मचाई हलचल

नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच अब कानूनी सहायता के लिए घोषित फंड और एक प्रमुख कार्यकर्ता के परिवार की वित्तीय स्थिति को लेकर नए सवाल उठाए गए हैं। गुजरात के सूरत निवासी एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और केंद्रीय कर अधिकारियों को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है।

RTI कार्यकर्ता ने अपने पत्र में कहा है कि NEET पेपर लीक मामले में प्रदर्शन करने वाले CJP कार्यकर्ताओं के लिए घोषित लीगल डिफेंस फंड की पारदर्शिता की जांच की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके की आर्थिक स्थिति की भी जांच कराने की मांग की है।

रिटायर्ड कर्मचारी की संपत्ति पर उठाए सवाल

पत्र में कहा गया है कि भगवानराव दिपके महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। RTI कार्यकर्ता ने यह जानने की मांग की है कि एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी अपने बेटे को विदेश में उच्च शिक्षा दिलाने के लिए आवश्यक आर्थिक संसाधन कैसे जुटा पाया। उनका कहना है कि संबंधित एजेंसियों को इस संबंध में वित्तीय जांच करनी चाहिए।

CJP के वैधानिक दर्जे की जांच की मांग

RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग से यह भी अनुरोध किया है कि CJP की कानूनी स्थिति स्पष्ट की जाए। उनका दावा है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों के समान कार्य कर रहा है और उसके नाम पर फंड एकत्र किए जा रहे हैं, तो यह जांच का विषय है कि वह संबंधित कानूनों के तहत विधिवत पंजीकृत है या नहीं।

उन्होंने मांग की है कि यदि संगठन पंजीकृत नहीं है, तो उसके संचालन और फंड जुटाने की प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए।

1 करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड पर भी उठे सवाल

मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा NEET पेपर लीक मामले में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की कानूनी सहायता के लिए घोषित 1 करोड़ रुपये के योगदान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

RTI कार्यकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को भेजे पत्र में इस राशि पर लागू कर नियमों और GST देनदारी की जांच कराने की मांग की है।

अभी तक नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया

फिलहाल इस मामले में संबंधित पक्षों या सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मांग RTI कार्यकर्ता द्वारा भेजे गए पत्रों पर आधारित है और जांच की प्रक्रिया शुरू होने या किसी भी आरोप की पुष्टि होना अभी बाकी है।

 

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