
दो दिवसीय सत्र की अवधि पर उठे सवाल, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने और ग्राम प्रधानों की मांगें पूरी करने की उठी आवाज; जंगलचट्टी में जाम से विधानसभा जाने वाले मार्ग पर यातायात प्रभावित
गैरसैंण/चमोली। भराड़ीसैंण में उत्तराखंड विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही विभिन्न संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया। विधानसभा पहुंचने वाले मुख्य मार्ग पर जंगलचट्टी बैरिकेडिंग के पास ग्राम प्रधान संगठन, उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) और स्वराज अभियान से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अपनी मांगें उठाईं। विरोध के चलते विधानसभा जाने वाले मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ और अधिकारियों, कर्मचारियों तथा मीडियाकर्मियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।
विधानसभा सत्र के पहले दिन हुए प्रदर्शनों में ग्राम प्रधानों की लंबित मांगों से लेकर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने तक के मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा सत्र की अवधि केवल दो दिन रखे जाने पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि प्रदेश में बेरोजगारी, महिला उत्पीड़न, भू-कानून, स्थानीय लोगों के अधिकार और अन्य जनहित से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

ग्राम प्रधानों ने सरकार पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप
प्रधान संगठन के अध्यक्ष आनंद सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि संगठन पिछले करीब छह महीने से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि सचिवालय कूच के दौरान प्रशासन की ओर से मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
चौहान के मुताबिक, ग्राम प्रधानों को बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि उनकी मांगों पर प्रभावी निर्णय नहीं लिया जा रहा। मनरेगा से जुड़े विषय, ग्राम प्रधानों का मानदेय और अन्य लंबित मांगें संगठन के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर ठोस कदम उठाने की अपील की।
दो दिन के सत्र में कैसे उठेंगे जनता के सवाल?
प्रधान संगठन के उपाध्यक्ष सुरेश उनियाल ने भी सरकार पर ग्राम प्रधानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लगातार मांग उठाने के बावजूद सुनवाई नहीं होने के कारण संगठन को प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
उनियाल ने विधानसभा सत्र की अवधि पर सवाल उठाते हुए कम से कम 10 से 15 दिन का सत्र आयोजित करने की मांग की। उनका कहना था कि इतने कम समय में प्रदेश की गंभीर समस्याओं पर पर्याप्त चर्चा संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं के रोजगार, महिलाओं के खिलाफ अपराध, अंकिता हत्याकांड, भू-कानून, स्थानीय लोगों के अधिकार और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने जैसे मुद्दों पर सदन में विस्तार से चर्चा की जरूरत बताई।
स्वराज अभियान ने बेरोजगारी और श्रमिकों की मजदूरी का मुद्दा उठाया
प्रदर्शन में शामिल स्वराज अभियान से जुड़े सुरेश चंद्र और रमेश जोशी ने भी विधानसभा सत्र की कम अवधि पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर सार्थक चर्चा के लिए सदन की कार्यवाही को पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने बेरोजगारी, महिला उत्पीड़न, अंकिता हत्याकांड, भू-कानून और श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि इन विषयों पर सरकार और विपक्ष के बीच विस्तार से चर्चा होनी चाहिए, ताकि जनता की समस्याओं को सदन में उचित स्थान मिल सके।
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग फिर चर्चा में
उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने गैरसैंण को प्रदेश की स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग उठाई। कार्यकर्ताओं का कहना था कि गैरसैंण उत्तराखंड राज्य आंदोलन की भावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान है और इसे स्थायी राजधानी बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
यूकेडी कार्यकर्ताओं ने पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, स्थानीय लोगों के अधिकारों और पहाड़ों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजधानी के मुद्दे पर सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए, ताकि राज्य आंदोलन से जुड़ी भावनाओं और अपेक्षाओं पर गंभीरता से विचार हो सके।
प्रदर्शन के चलते पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत
विधानसभा सत्र को देखते हुए जंगलचट्टी क्षेत्र में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस तैनात रही। हालांकि, बैरिकेडिंग के पास अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शन के कारण विधानसभा की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। जाम की स्थिति के चलते अधिकारियों, कर्मचारियों और मीडियाकर्मियों को आगे बढ़ने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पुलिस ने मौके पर व्यवस्था संभालने का प्रयास किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। विधानसभा सत्र के पहले ही दिन हुए इन प्रदर्शनों ने ग्राम प्रधानों की मांगों, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने और प्रदेश के महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर संबंधित संगठनों की नजर रहेगी।












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