उत्तराखंड की केदारघाटी में जहां एक ओर बेरोजगारी बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर ऊखीमठ ब्लॉक के ग्राम सभा गैंड बष्टी के निवासी बलवीर सिंह राणा ने स्वरोजगार की प्रेरक पहल करते हुए मत्स्य पालन का भव्य कारोबार शुरू किया है।
उन्होंने वर्ष 2020 में अपने गांव गैंड बष्टी में मत्स्य पालन की शुरुआत की थी। लगातार प्रयास और सफलता के बाद अब 26 फरवरी को उन्होंने ऊखीमठ ब्लॉक में भी मत्स्य पालन इकाई का शुभारंभ कर अपने कारोबार का विस्तार किया है।
2020 से शुरू हुई स्वरोजगार की यात्रा
बलवीर सिंह राणा ने बताया कि वे 2020 से अपने गांव में समूह के माध्यम से मत्स्य पालन के साथ-साथ “मंगलम अचार” का व्यवसाय भी संचालित कर रहे हैं। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने अब ऊखीमठ ब्लॉक में नई यूनिट स्थापित की है।
उनके इस प्रयास से क्षेत्र के 4-5 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है, जिससे पलायन रोकने में मदद मिल रही है।
देशभर में सप्लाई, ₹500 प्रति किलो तय दाम
उन्होंने जानकारी दी कि उनके यहां उत्पादित मछली की आपूर्ति आर्मी आईटीआई गौचर और एसएसबी श्रीनगर सहित मांग के अनुसार रुद्रप्रयाग जिले एवं अन्य स्थानों पर की जाती है।
मत्स्य उत्पाद का मूल्य ₹500 प्रति किलो निर्धारित किया गया है और यह वर्षभर उपलब्ध रहता है।
युवाओं के लिए संदेश
बलवीर सिंह राणा का कहना है कि आज के समय में केदारघाटी और उत्तराखंड का हर युवा स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकता है। शुरुआती दौर में कुछ चुनौतियां जरूर आती हैं, लेकिन मेहनत और धैर्य से सफलता हासिल की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई भी इच्छुक युवा मत्स्य पालन शुरू करना चाहता है तो वे हर संभव मार्गदर्शन देने के लिए तैयार हैं। इच्छुक व्यक्ति उनसे मोबाइल नंबर 8958658338 पर संपर्क कर सकते हैं।
सरकारी नौकरी ही नहीं, स्वरोजगार भी विकल्प
इस पहल का मुख्य संदेश यही है कि जीवन में केवल सरकारी नौकरी ही एकमात्र विकल्प नहीं है। स्वरोजगार के माध्यम से भी बेहतर आय और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
बलवीर सिंह राणा की यह पहल क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है और पलायन रोकने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।













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