उत्तराखंड में भीषण गर्मी के बीच शिक्षा व्यवस्था की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य के 275 सरकारी स्कूल आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर पड़ रहा है।
तेज गर्मी और उमस के कारण छात्र कक्षाओं में असहज महसूस कर रहे हैं। कई स्कूलों में हालात ऐसे हैं कि बच्चों के लिए बैठना तक मुश्किल हो गया है। इससे लू लगने और बीमार होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे अभिभावकों में भी चिंता बढ़ रही है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा समस्या
- पौड़ी गढ़वाल – 66 स्कूल
- अल्मोड़ा – 58 स्कूल
- नैनीताल – 54 स्कूल
- पिथौरागढ़ – 43 स्कूल
- टिहरी गढ़वाल – 17 स्कूल
- बागेश्वर – 14 स्कूल
- चमोली – 9 स्कूल
- उत्तरकाशी – 8 स्कूल
- देहरादून – 6 स्कूल
ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
शिक्षकों की चिंता
शिक्षकों के अनुसार, बिजली न होने से न सिर्फ गर्मी बढ़ती है, बल्कि बच्चों की एकाग्रता और सीखने की क्षमता भी प्रभावित होती है। कई स्कूलों में तो बिजली कनेक्शन तक नहीं है, जिससे पंखे या अन्य सुविधाएं लगाना संभव नहीं।
पेयजल संकट भी गहराया
स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब 191 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा भी नहीं है।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले:
- पिथौरागढ़ – 89 स्कूल
- नैनीताल – 43 स्कूल
- अल्मोड़ा – 15 स्कूल
- पौड़ी गढ़वाल – 15 स्कूल
- चंपावत – 13 स्कूल
- देहरादून – 7 स्कूल
- उत्तरकाशी – 6 स्कूल
- रुद्रप्रयाग – 2 स्कूल
- टिहरी गढ़वाल – 1 स्कूल
विभाग का पक्ष
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी के अनुसार,
- कुछ स्कूलों में बिजली बिल जमा नहीं होने के कारण सप्लाई बाधित है
- कई जगह बिजली के खंभे ही नहीं हैं
- सभी स्कूलों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे ताकि बिजली सुविधा उपलब्ध कराई जा सके
उन्होंने यह भी बताया कि रखरखाव के लिए धनराशि वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन मिली, जिससे समय पर उपयोग नहीं हो पाया।
भीषण गर्मी में जब बच्चे राहत की उम्मीद करते हैं, तब बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी उनकी पढ़ाई और सेहत दोनों पर भारी पड़ रही है। यह स्थिति राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।












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