एक्शन मोड में शासन: SDO राजीव नयन नौटियाल को कारण बताओ नोटिस जारी

देहरादून/विकासनगर: उत्तराखंड वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) राजीव नयन नौटियाल एक बार फिर चर्चाओं में हैं।

इस बार उनके खिलाफ शासकीय कार्यों में लापरवाही के आरोपों को लेकर शासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

क्या है पूरा मामला?

विकासनगर और चकराता क्षेत्र में तैनात SDO राजीव नयन नौटियाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया।

शिकायतों में यह भी कहा गया है कि वे विभागीय मंत्री स्तर की महत्वपूर्ण बैठकों में भी अनुपस्थित रहे।

इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए शासन ने उन्हें नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। नोटिस में साफ किया गया है कि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

पहले भी चर्चाओं में रहे नौटियाल

राजीव नयन नौटियाल इससे पहले भी उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में उनके साथ सरेआम मारपीट की घटना सामने आई थी।

SDO का आरोप था कि वे अवैध खनन से जुड़े वाहनों की तस्वीरें ले रहे थे, इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके साथ बहस की और बाद में मारपीट की। इस मामले में उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था।

 SDO का पक्ष: 

इस मामले में जब एसडीओ राजीव नयन नौटियाल से बात करी तो उन्होंने बताया कि मुझे विक्टिमाइज किया जा रहा है,मुझे क्षेत्र में जाने के लिए गाड़ी में पेट्रोल तक भी नहीं दिया जा रहा है और उसके बाद कहा जा रहा है कि मैं शासकीय कार्यों में लापरवाही कर रहा हूं। और मुझे कारण बताओ नोटिस भेजा गया हैं।
जिस तरीके से मुझ पर हमला हुआ तो मैंने सिक्योरिटी की मांग की मुझे वह भी नहीं दी गई। वनाग्नि के नाम पर करोड़ों का बजट आता है लेकिन रेंजरो और एसडीओ को देने के लिए विभाग के पास पैसे नहीं है। मैं जल्दी कारण बताओं नोटिस का जवाब विभाग को भेज दूंगा।

विभाग पर भी उठे सवाल

इस प्रकरण के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ अधिकारी पर लापरवाही के आरोप हैं, तो दूसरी ओर अधिकारी खुद संसाधनों की कमी और सुरक्षा न मिलने की बात कह रहे हैं।

आगे क्या?

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि SDO राजीव नयन नौटियाल द्वारा दिया जाने वाला जवाब कितना संतोषजनक होता है। इसके आधार पर ही शासन आगे की कार्रवाई तय करेगा।

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