जंतर-मंतर पर आज न्याय की हुंकार, अंकिता केस में फिर तेज हुआ आंदोलन

देहरादून:   उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर देश की राजधानी में एक बार फिर जनआक्रोश देखने को मिलेगा। अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक और जन संगठनों द्वारा आज दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। इस प्रदर्शन में कांग्रेस पार्टी भी शामिल होगी और सत्याग्रह करेगी।

सुबह 10 बजे से प्रदर्शन, आम जनता से शामिल होने की अपील

अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने आम लोगों से अपील की है कि वे सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचकर इस प्रदर्शन में भाग लें। मंच की सदस्य कमला पंत ने बताया कि 2022 में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था।

दोषियों को सजा, लेकिन ‘VIP’ अब भी जांच से बाहर

मामले में मुख्य आरोपियों—जो एक भाजपा नेता के बेटे और उसके सहयोगी थे—को अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि इस मामले में कथित ‘VIP’ को अब तक जांच के दायरे में नहीं लाया गया है।

आरोप है कि इसी ‘VIP’ के लिए अंकिता पर “एक्स्ट्रा सर्विस” देने का दबाव बनाया जा रहा था। हाल ही में एक ऑडियो क्लिप में भी कथित तौर पर इस VIP का नाम सामने आने का दावा किया गया है, जिससे मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है।

CBI जांच की मांग, सरकार पर सवाल

संघर्ष मंच का कहना है कि उत्तराखंड की जनता लंबे समय से इस मामले की CBI जांच और वह भी सिटिंग जज की निगरानी में कराने की मांग कर रही थी।
हालांकि, जनदबाव के बाद जांच CBI को सौंप दी गई, लेकिन अब तक कथित VIP पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों में आक्रोश बना हुआ है—खासतौर पर महिलाओं में।

कांग्रेस का सत्याग्रह, कई बड़े नेता होंगे शामिल

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने बताया कि पार्टी जंतर-मंतर पर सत्याग्रह करेगी।

इस प्रदर्शन में कई प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां शामिल होंगी, जिनमें:

  • कमला पंत
  • हरिपाल रावत
  • उमाकांत लखेड़ा
  • अनिल पंत
  • मनमोहन सिंह
  • देव सिंह

प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा

जनता में उबाल, न्याय की मांग तेज

यह प्रदर्शन सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनता के गुस्से और न्याय की मांग का प्रतीक बन चुका है। आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि जब तक हर दोषी—चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो—कानून के घेरे में नहीं आता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

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