8 लाख युवाओं तक पहुंचा नशामुक्ति का संदेश, राज्यपाल बोले- अब पूरे देश को जोड़ने की जरूरत

देहरादून: सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में ‘नशा-मुक्त युवा: विकसित भारत का भविष्य एवं वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सिंग एवं पैरामेडिकल पेशेवरों की भूमिका, अवसर, कौशल एवं संभावनाएं’ विषय पर युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सजग इंडिया की ओर से किया गया, जिसमें उत्तराखंड के राज्यपाल ले. जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) स्वर्गीय जनरल बिपिन रावत के नाम पर स्थापित सभागार का लोकार्पण किया। इसके साथ ही सजग इंडिया की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सजग इंडिया एवं सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के अध्यक्ष एडवोकेट ललित मोहन जोशी द्वारा राज्यपाल एवं अन्य अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। उन्होंने सजग इंडिया की ओर से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की जानकारी दी।

ललित मोहन जोशी ने बताया कि उत्तराखंड पुलिस एवं राज्य सरकार के संयुक्त तत्वावधान में सजग इंडिया पिछले लगभग डेढ़ दशक से युवा संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रहा है। यह अभियान प्रदेश के सभी 13 जनपदों और 95 विकासखंडों तक पहुंच चुका है। हाल ही में प्रदेश के प्रथम गांव माणा से भी अभियान की शुरुआत की गई है।

उन्होंने कहा कि अब इस अभियान को गंगा से गंगासागर और कश्मीर से कन्याकुमारी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। देश के प्रत्येक युवा को नशामुक्त बनाने तक अभियान जारी रखने की बात कही गई।

नशे के खिलाफ पूरे समाज को एकजुट होने की जरूरत

युवा संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ले. जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें पूरे समाज की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि परिवार, शिक्षक, डॉक्टर, दोस्त और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।

राज्यपाल ने कहा कि युवाओं से संवाद के दौरान यह महसूस हुआ कि सभी के मन में ड्रग्स के खिलाफ लड़ने की भावना है। उन्होंने कहा कि नशा परिवार और समाज दोनों को प्रभावित करता है। कोई व्यक्ति जब पहली बार गलत कदम उठाता है तो उसके लिए वापस लौटना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि युवाओं को समय रहते सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले।

उन्होंने नशे की गिरफ्त में आने वाले युवाओं और उनके परिवारों की पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि समाज को इस दर्द को समझना होगा और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए हर स्तर पर प्रयास करने होंगे।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार, समाज और प्रत्येक नागरिक की सोच नशे के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की होनी चाहिए। उन्होंने सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में नशे के खिलाफ किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि सजग इंडिया के माध्यम से पिछले 18 वर्षों में 8 लाख से अधिक युवाओं तक पहुंचकर नशे के खिलाफ जागरूकता का कार्य किया गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी इस दिशा में काफी काम किया जाना बाकी है।

नशामुक्ति का संदेश पूरे देश तक पहुंचाने का आह्वान

राज्यपाल ने एडवोकेट ललित मोहन जोशी के अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इसकी सोच और उद्देश्य सराहनीय है। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति का संदेश केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे पूरे देश और मानव समाज तक पहुंचाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा भी 2 अगस्त से 100 सप्ताह के नशामुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गई है। गृह मंत्रालय और देश की विभिन्न एजेंसियां ड्रग्स के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ आम लोगों और युवाओं की भागीदारी भी बेहद जरूरी है।

राज्यपाल ने कहा कि भारत के सामने ड्रग्स एक बड़ी चुनौती है। सीमाओं के रास्ते आने वाला नशा केवल स्वास्थ्य और सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि इसके साथ आतंकवाद की चुनौती भी जुड़ी हुई है। इसलिए देश के प्रत्येक नागरिक को नशे के खिलाफ इस लड़ाई में अपनी भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने युवाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें देखकर विश्वास होता है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और युवा शक्ति ही विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

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