देहरादून और आसपास के इलाकों में अब अमेरिकन और जर्मन कॉकरोच के साथ एक नई प्रजाति ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटिश व आयरिश मूल का माना जाने वाला ब्राउन बैंडेड कॉकरोच तेजी से घरों में फैल रहा है। यह छोटा कॉकरोच खासतौर पर बेडरूम, सोफा, फ्रिज और फर्नीचर के आसपास अपनी कॉलोनी बना रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार देहरादून का लगभग 10 महीने तक रहने वाला अनुकूल मौसम इस प्रजाति के तेजी से बढ़ने की बड़ी वजह बन रहा है। पेस्ट कंट्रोल एजेंसियों को अब इस नई प्रजाति के लिए अलग रणनीति और कम दुर्गंध वाले विशेष पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
घरों में तेजी से बढ़ रहा ब्राउन बैंडेड कॉकरोच
कॉकरोच की हजारों प्रजातियां दुनिया भर में पाई जाती हैं, लेकिन इनमें से केवल कुछ ही इंसानों के घरों और आसपास सक्रिय रहती हैं। देहरादून में लंबे समय से अमेरिकन और जर्मन कॉकरोच प्रमुख रूप से पाए जाते रहे हैं।
- अमेरिकन कॉकरोच आमतौर पर सीवर और गंदी जगहों में पाया जाता है।
- जर्मन कॉकरोच रसोई और खाने-पीने की जगहों में अधिक सक्रिय रहता है।
- वहीं ब्राउन बैंडेड कॉकरोच बेडरूम, सोफा, बेड और इलेक्ट्रॉनिक सामान के आसपास देखा जा रहा है।
यह प्रजाति आकार में छोटी होती है और इसके शरीर पर हल्की भूरी धारियां होती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह 22 से 33 डिग्री सेल्सियस तापमान में तेजी से पनपती है।
विदेशों से आने की आशंका
जानकारों का मानना है कि यह कॉकरोच मूल रूप से ब्रिटेन और आयरलैंड जैसे देशों में अधिक पाया जाता है। संभावना जताई जा रही है कि यह वर्षों पहले विदेशों से सामान या यात्रियों के जरिए देहरादून पहुंचा हो और अब यहां स्थायी रूप से फैलने लगा है।
देहरादून में करोड़ों का पेस्ट कंट्रोल बाजार
देहरादून में पेस्ट कंट्रोल का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। शहर में 32 लाइसेंसधारी पेस्ट कंट्रोल एजेंसियां संचालित हैं, जबकि 400 से ज्यादा एजेंसियां बिना लाइसेंस के काम कर रही हैं।
अनुमान के मुताबिक देहरादून में हर साल कीट नियंत्रण पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिसमें लगभग 10 करोड़ रुपये केवल कॉकरोच कंट्रोल पर खर्च किए जाते हैं। इसका बड़ा हिस्सा होटल, रेस्टोरेंट और कमर्शियल संस्थानों में उपयोग होता है।
भारत में हजारों करोड़ का कारोबार
भारत में पेस्ट कंट्रोल इंडस्ट्री का बाजार लगभग 6000 करोड़ रुपये का माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसमें कॉकरोच नियंत्रण पर ही करीब 2500 से 3000 करोड़ रुपये तक खर्च किए जाते हैं। इसमें पेस्ट कंट्रोल एजेंसियों के साथ खुले बाजार में बिकने वाले पेस्टीसाइड भी शामिल हैं।
स्वास्थ्य के लिए भी बन सकता है खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक कॉकरोच केवल गंदगी का संकेत नहीं हैं, बल्कि ये कई तरह के बैक्टीरिया और एलर्जी फैलाने का कारण भी बन सकते हैं। खासतौर पर बच्चों और अस्थमा मरीजों के लिए यह समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे में समय-समय पर सफाई और प्रोफेशनल पेस्ट कंट्रोल की सलाह दी जा रही है।











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