उत्तराखंड राज्य गठन के करीब 26 साल बाद पहली बार चंपावत जिले के बनबसा में प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में एनएचपीसी परिसर में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों पर चर्चा की गई और कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक में युवाओं की स्किलिंग, कुक्कुट पालन, उच्च शिक्षा, कर्मचारियों की संपत्ति के विवरण, नजूल भूमि के नियमितीकरण और विभागीय समन्वय समेत कई विषयों पर निर्णय लिए गए।
बनबसा में आयोजित यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि राज्य गठन के बाद पहली बार चंपावत जिले में कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक के जरिए सरकार ने यह संकेत भी दिया कि भविष्य में मंत्रिमंडल की बैठकें प्रदेश के अन्य जिलों में भी आयोजित की जा सकती हैं, ताकि स्थानीय जरूरतों और क्षेत्रीय समस्याओं को करीब से समझकर निर्णय लिए जा सकें।
कैबिनेट बैठक में पहाड़ी क्षेत्रों के कुक्कुट पालकों को फीड पर सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया। यह सहायता डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों के वेलफेयर अकाउंट में पहुंचाई जाएगी। सरकार के मुताबिक इस फैसले से करीब 2,000 कुक्कुट पालकों को लाभ मिलेगा और इसके लिए लगभग 2 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।
युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने ₹200 करोड़ की स्किलिंग योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत कुछ विषयों के विद्यार्थियों को ग्रेजुएशन के बाद रोजगार के लिए जरूरी व्यावहारिक और तकनीकी दक्षता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। विद्यार्थियों को स्किल आधारित कोर्स कराए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक सेमेस्टर में छह क्रेडिट के पाठ्यक्रम शामिल होंगे। इन कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत नई तकनीकों और रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप अन्य स्किल को शामिल किया जाएगा।
उच्च शिक्षा विभाग में छात्रों के लिए स्किल डिप्लोमा से जुड़े कोर्स शुरू करने का भी निर्णय लिया गया है। सरकार के अनुसार इससे प्रदेश के एक लाख से अधिक छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट ने पशुपालन, मत्स्य और डेयरी विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए डायरेक्टर जनरल के पद को अपग्रेड करने को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य तीनों विभागों के कार्यों में बेहतर तालमेल और प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना है।
बैठक में टीडीसी को 66 करोड़ रुपये का स्पेशल पैकेज देने का निर्णय भी लिया गया।
कर्मचारी आचरण नियमों में संशोधन के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी। इसके तहत संबंधित श्रेणियों के कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का विवरण निर्धारित अवधि के अनुसार देना होगा। बैठक में समूह क, ख और ग के कर्मचारियों की संपत्ति विवरण व्यवस्था को लेकर भी निर्णय लिया गया।
प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी के पद को समूह ‘ख’ में शामिल करने को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए पहले लागू 10 एकड़ भूमि की अनिवार्यता में बदलाव करते हुए 20,000 वर्ग मीटर भूमि में विश्वविद्यालय स्थापित करने का रास्ता साफ किया गया है। इसके साथ ही 5 करोड़ रुपये के गारंटी फंड को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
कैबिनेट ने डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को भी मंजूरी दी है।
प्रदेश में नजूल भूमि के नियमितीकरण को लेकर अभियान चलाने का फैसला किया गया है। खटीमा, बनबसा और चंपावत के अलावा प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में मौजूद नजूल भूमि के नियमितीकरण की प्रक्रिया भी अभियान के रूप में आगे बढ़ाई जाएगी।
वन विभाग से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) बनाने को लेकर भी कैबिनेट बैठक में चर्चा हुई।
टिहरी जिले के नरेंद्र नगर में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोले जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।
सरकार का कहना है कि बनबसा में आयोजित कैबिनेट बैठक का उद्देश्य केवल राजधानी तक सीमित प्रशासनिक निर्णयों के बजाय प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय जरूरतों को शासन के केंद्र में लाना है। युवाओं के कौशल विकास, रोजगार, शिक्षा, कृषि-पशुपालन और प्रशासनिक सुधार से जुड़े फैसलों को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।












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