प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (Economic Advisory Council to the Prime Minister – EAC-PM) ने महिलाओं को सीधे बैंक खातों में दी जाने वाली Cash Transfer Schemes को लेकर अहम सिफारिश की है। परिषद का कहना है कि 15 राज्यों में चल रही महिला सहायता योजनाओं की राशि की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि महंगाई और बढ़ती घरेलू जरूरतों के अनुसार लाभार्थियों को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिल सके।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि महंगाई बढ़ती है और परिवारों का खर्च बढ़ता है तो सरकारों को सहायता राशि में भी आवश्यक बढ़ोतरी पर विचार करना चाहिए।
इन दो योजनाओं के अध्ययन के बाद सामने आई रिपोर्ट
EAC-PM ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के दौरान महाराष्ट्र की ‘माझी लाडकी बहिन योजना’ और ओडिशा की ‘सुभद्रा योजना’ का विस्तृत अध्ययन किया।
रिपोर्ट में पाया गया कि इन योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। लाभार्थियों की बचत बढ़ी, घरेलू खर्चों को पूरा करने में मदद मिली और परिवार की वित्तीय स्थिरता में भी सुधार देखा गया।
महिलाओं को सिर्फ पैसे नहीं, डिजिटल और स्किल सपोर्ट भी मिले
परिषद ने सुझाव दिया कि केवल नकद सहायता देना पर्याप्त नहीं है। महिलाओं को Digital Literacy, Skill Development और Self Help Groups (SHGs) से भी जोड़ा जाना चाहिए।
इससे महिलाएं स्वरोजगार, छोटे व्यवसाय और वित्तीय प्रबंधन में अधिक सक्षम बन सकेंगी और उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर भी खुलेंगे।
कैश स्कीम से बढ़ा UPI का इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खातों में सीधे पैसा आने के बाद UPI Payments का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है।
महिलाएं अब शिक्षा, स्वास्थ्य, बच्चों की जरूरतों और जीवनशैली से जुड़े खर्चों पर पहले की तुलना में अधिक निवेश कर रही हैं। इससे डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा मिला है।
करीब 12 करोड़ महिलाओं को मिल रहा लाभ
EAC-PM के अनुसार, देश के 15 राज्यों में लगभग 12 करोड़ महिलाओं को Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जा रही है।
परिषद का मानना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
जानिए किस राज्य में महिलाओं को कितनी सहायता मिलती है
| राज्य | योजना | सहायता राशि |
|---|---|---|
| मध्य प्रदेश | लाडली बहना योजना | ₹1,250 प्रति माह |
| छत्तीसगढ़ | महतारी वंदन योजना | ₹1,000 प्रति माह |
| झारखंड | मइयां सम्मान योजना | ₹1,000 प्रति माह |
| दिल्ली | महिला समृद्धि योजना | ₹2,500 प्रति माह |
| पश्चिम बंगाल | लक्ष्मी भंडार | ₹1,500-₹1,700 प्रति माह |
| महाराष्ट्र | माझी लाडकी बहिन | ₹1,500 प्रति माह |
| ओडिशा | सुभद्रा योजना | ₹10,000 सालाना (दो किस्तों में) |
| तमिलनाडु | मगलीर उरीमाई थोगाई | ₹1,000 प्रति माह |
| कर्नाटक | गृह लक्ष्मी | ₹2,000 प्रति माह |
| असम | अरुणोदोई | ₹1,250 प्रति माह |
| हिमाचल प्रदेश | इंदिरा गांधी प्यारी बहना | ₹1,500 प्रति माह |
| तेलंगाना | महालक्ष्मी योजना | ₹2,500 प्रति माह |
| आंध्र प्रदेश | आदाबिद्दा निधि योजना | ₹1,500 प्रति माह |
| पंजाब | मावां धीयां सत्कार | ₹1,000-₹1,500 प्रति माह |
| गोवा | गृह आधार योजना | ₹1,500 प्रति माह |
क्या बढ़ सकती है सहायता राशि?
फिलहाल EAC-PM ने केवल सिफारिश की है। सहायता राशि बढ़ाने का अंतिम निर्णय संबंधित राज्य सरकारें लेंगी। हालांकि, परिषद का मानना है कि महंगाई के अनुरूप समय-समय पर राशि की समीक्षा करने से महिलाओं को अधिक प्रभावी आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की सिफारिशों पर आधारित है। सहायता राशि बढ़ाने का कोई आधिकारिक निर्णय अभी घोषित नहीं किया गया है।













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