G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षित समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। हालांकि, ओमान तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र करते समय अमेरिका का नाम नहीं लेने पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोला है।
G7 सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा पर बोले पीएम मोदी
फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं अधिक आपस में जुड़ी हुई है और किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत के मित्र देशों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है और इस संघर्ष में भारत के कई नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है। पीएम मोदी ने समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि दुनिया भर के नाविक बिना किसी भय के अपना कार्य कर सकें।
ओमान तट पर हमले में हुई थी तीन भारतीयों की मौत
9 जून को ओमान के तट के पास कमर्शियल जहाज ‘सेटेबेलो’ (Setebello) पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया था।
मृत भारतीय नाविकों की पहचान आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और परनाला सुरेश के रूप में हुई थी।
इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में भारतीय क्रू सदस्यों वाले दो अन्य जहाजों पर भी हमले हुए थे, हालांकि उनमें किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
ट्रंप और मोदी की हुई अहम मुलाकात
जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आमने-सामने मुलाकात भी हुई। माना जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर और भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई तल्खी के बीच यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण रही।
भारत इस सम्मेलन में अतिथि देश के रूप में शामिल हुआ था।
अमेरिका का नाम न लेने पर विपक्ष का हमला
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने सवाल उठाए कि भारतीय नागरिकों की मौत का जिक्र करने के बावजूद प्रधानमंत्री ने अमेरिका का नाम क्यों नहीं लिया।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भारतीय नाविकों की मौत के मामले में प्रधानमंत्री अमेरिका का नाम लेने का साहस नहीं दिखा सके।
वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद सरकार अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख नहीं अपना रही है।
भारत ने अमेरिका के सामने दर्ज कराया था विरोध
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस घटना को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत की थी। जयशंकर ने अमेरिकी कार्रवाई पर भारत की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया था और इसे अनुचित बताया था।
हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा था कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राहुल गांधी ने भी उठाए सवाल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद अमेरिका की ओर से न तो कोई खेद व्यक्त किया गया और न ही माफी मांगी गई।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत सरकार देश के सम्मान और नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर अपेक्षित मजबूती नहीं दिखा रही है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ा असर
अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज़ स्ट्रेट में उत्पन्न संकट का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ा। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। इस कारण वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिला।
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की दिशा में प्रगति होने के बाद हालात सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।















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