निवेशकों के लिए बुरी खबर! US-ईरान तनाव बढ़ते ही शेयर बाजार में मची भगदड़

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी दिन भी गिरावट देखने को मिली। गुरुवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 300 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी (NSE Nifty) करीब 100 अंकों की कमजोरी के साथ खुला। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान विवाद, होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर (Red Sea) में बढ़ते संकट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत

गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,755 अंक के मुकाबले गिरकर 76,515 अंक पर खुला। शुरुआती कारोबार के दौरान यह और फिसलकर 76,344 अंक तक पहुंच गया।

वहीं एनएसई निफ्टी भी पिछले बंद 23,996 अंक से गिरकर 23,904 अंक पर खुला और कुछ ही देर में 23,876 अंक तक पहुंच गया।

बाजार में हर तरफ बिकवाली का दबाव

शुरुआती कारोबार में लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली।

लार्जकैप शेयरों में गिरावट:

  • IndiGo
  • HDFC Bank
  • SBI
  • Bajaj Finance

इन कंपनियों के शेयरों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

मिडकैप शेयरों में दबाव:

  • Hindustan Petroleum
  • GMR Airport
  • Phoenix Ltd
  • Persistent

इन शेयरों में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।

शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में लगातार गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव है।

  • अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी और धमकियां।
  • होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा संकट।
  • लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों से वैश्विक व्यापार प्रभावित।
  • कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंता।
  • निवेशकों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का डर।

इन सभी कारणों से बाजार में जोखिम लेने की भावना कमजोर हुई है।

ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के पार

मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। तेल की कीमतों में तेजी से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की आशंका है। इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर पड़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखते हुए लंबी अवधि की निवेश रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा। जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी रह सकती है।

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