Gold Crash 2026: 2013 के बाद सबसे बड़ी गिरावट, निवेशकों के उड़े होश

नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में मार्च महीना सोने के निवेशकों के लिए बड़ा झटका लेकर आया। World Gold Council (WGC) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने सोने की कीमतों में करीब 12% की गिरावट दर्ज की गई — जो कि जून 2013 के बाद सबसे खराब मासिक प्रदर्शन माना जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरकर लगभग 4,608 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। हालांकि इस गिरावट के बावजूद, साल 2026 के कुल प्रदर्शन में सोना अभी भी सकारात्मक स्थिति में बना हुआ है।

 गिरावट के पीछे ये बड़े कारण

1. गोल्ड ETF से रिकॉर्ड निकासी

मार्च में वैश्विक स्तर पर गोल्ड ETF से लगभग 12 बिलियन डॉलर (करीब 84 टन सोना) की भारी निकासी हुई।
खासकर उत्तरी अमेरिका में निवेशकों ने बड़े पैमाने पर पैसा बाहर निकाला, जिससे बाजार में दबाव बढ़ गया।

2. COMEX पर घटती पोजीशन

COMEX (कमोडिटी एक्सचेंज) पर संस्थागत और रिटेल निवेशकों ने तेजी से अपनी पोजीशन कम की।
इससे बाजार में बिकवाली का माहौल बना और कीमतों में गिरावट तेज हो गई।

3. नकदी (Liquidity) की जरूरत बढ़ना

वैश्विक बाजारों में गिरावट के कारण निवेशकों को नुकसान की भरपाई के लिए नकदी की जरूरत पड़ी।
ऐसे में उन्होंने सोने जैसी हाई लिक्विड एसेट को बेचकर कैश जुटाया।

4. मार्केट मोमेंटम फैक्टर

WGC की रिपोर्ट में बताया गया कि ‘मोमेंटम फैक्टर्स’ ने गिरावट को और तेज किया।
यानी जब कीमत गिरनी शुरू हुई, तो निवेशकों ने और तेजी से बिकवाली की।

 एशियाई बाजार से मिली राहत

जहां अमेरिका और यूरोप में भारी बिकवाली देखने को मिली, वहीं एशियाई निवेशकों ने इसे खरीदारी का मौका माना।

  • एशिया में करीब 1.9 बिलियन डॉलर का निवेश (Inflow) दर्ज हुआ
  • कम कीमतों पर सोना खरीदने की मांग बढ़ी

यह संकेत देता है कि लंबे समय के निवेशक अभी भी सोने पर भरोसा बनाए हुए हैं।

 आगे क्या रहेगा ट्रेंड?

हालांकि मार्च का महीना कमजोर रहा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • अप्रैल की शुरुआत में ETF निवेश फिर से पॉजिटिव हो रहा है
  • वैश्विक तनाव और महंगाई अभी भी सोने को सपोर्ट दे सकते हैं
  • मध्यम अवधि में सोना अभी भी Safe Haven Investment बना हुआ है

मार्च 2026 में सोने की कीमतों में आई यह गिरावट भले ही ऐतिहासिक रही हो, लेकिन बाजार के जानकार इसे अस्थायी उतार-चढ़ाव मान रहे हैं।
एशियाई मांग और सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की पहचान इसे भविष्य में फिर मजबूती दे सकती है।

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