पेट्रोल-डीजल की मार से चारधाम यात्रा बेहाल! कई पंपों पर ‘नो फ्यूल’ बोर्ड

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और देशभर में लगातार बढ़ती तेल कीमतों के बीच उत्तराखंड में भी ईंधन संकट गहराने लगा है। खासतौर पर चारधाम यात्रा मार्ग पर पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। बदरीनाथ, केदारनाथ यात्रा मार्ग के कई पेट्रोल पंप सूख चुके हैं, जबकि कई जगह सीमित मात्रा में ही तेल दिया जा रहा है।

देहरादून में पेट्रोल की कीमत 100.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.90 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। हरिद्वार को छोड़कर उत्तराखंड के लगभग सभी जिलों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार चला गया है।

बदरीनाथ में पेट्रोल-डीजल की लिमिट तय

चारधाम यात्रा के चरम पर पहुंचने के साथ ही चमोली जिले में ईंधन संकट गंभीर होता जा रहा है। बदरीनाथ स्थित जीएमवीएन पेट्रोल पंप पर प्रशासन ने पेट्रोल और डीजल की सीमा तय कर दी है। यहां एक वाहन को अधिकतम 800 रुपये का पेट्रोल और 1000 रुपये का डीजल ही दिया जा रहा है।

ज्योतिर्मठ के एकमात्र पेट्रोल पंप पर तेल खत्म होने के बाद यात्रियों ने नाराजगी जताते हुए पुलिस के सामने नारेबाजी भी की। प्रशासन ने यात्रियों से अनावश्यक ईंधन भंडारण न करने और अफवाहों से बचने की अपील की है।

श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और पीपलकोटी में भी संकट

चारधाम यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों पर भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

  • श्रीनगर शहर के पांच में से चार पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल खत्म हो गया।
  • रुद्रप्रयाग में कई पंपों पर सीमित मात्रा में तेल दिया जा रहा है।
  • पीपलकोटी और ज्योतिर्मठ में यात्रियों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ा।
  • कई यात्री घंटों इंतजार के बाद भी तेल नहीं भरवा सके।

टैंकर नहीं पहुंचने से बढ़ी परेशानी

पूर्ति विभाग के अनुसार रविवार को ईंधन टैंकर समय पर नहीं पहुंच पाए, जिससे संकट और गहरा गया। प्रशासन का कहना है कि भुगतान और आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव के कारण अस्थायी समस्या उत्पन्न हुई है। हालांकि जल्द आपूर्ति सामान्य करने का दावा किया जा रहा है।

11 दिनों में चार बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

15 मई से शुरू हुई मूल्य वृद्धि के बाद अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। पिछले 11 दिनों में चार बार दाम बढ़ाए गए हैं।

पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब 600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। एलपीजी सिलेंडर पर भी कंपनियों को घाटा उठाना पड़ रहा है।

आम आदमी पर पड़ेगा सीधा असर

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

संभावित बड़े असर:

  • सब्जी, दूध और फल जैसी रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।
  • ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से किराना और अन्य सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • फूड डिलीवरी और ग्रॉसरी ऐप्स डिलीवरी चार्ज बढ़ा सकते हैं।
  • ऑटो, टैक्सी और बस किराए में बढ़ोतरी संभव है।
  • चारधाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों का खर्च बढ़ सकता है।

प्रशासन की अपील

चमोली प्रशासन ने यात्रियों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में अतिरिक्त ईंधन स्टोर न करें और केवल जरूरत के अनुसार ही तेल भरवाएं। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य किया जाएगा।

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