Advertisement

NEET काउंसलिंग में फर्जी सर्टिफिकेट का खेल! हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के प्रमाणपत्रों पर उठे सवाल; EWS, आधार कार्ड और मूल निवास प्रमाणपत्रों में भी गड़बड़ी के आरोप

देहरादून/नैनीताल: उत्तराखंड में NEET काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के तहत कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि प्रकरण की जांच के लिए पहले ही विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण करते हुए राजस्व सचिव को सभी संदिग्ध प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।

काउंसलिंग के दौरान सामने आया फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला

मामले के अनुसार, NEET की प्रथम और द्वितीय काउंसलिंग के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के तहत कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने का मामला सामने आया था। आरोप है कि कुछ प्रमाणपत्रों पर दर्ज संख्या और संबंधित व्यक्ति के नाम में मेल नहीं पाया गया। यानी प्रमाणपत्र पर दर्ज नंबर किसी अन्य व्यक्ति का था, जबकि नाम किसी दूसरे व्यक्ति का अंकित था।

EWS और मूल निवास प्रमाणपत्रों पर भी उठे सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से मामले का आगे सत्यापन किए जाने पर कथित तौर पर अन्य दस्तावेजों में भी गड़बड़ी की बात सामने आई। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और अधिवास यानी मूल निवास प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेज शामिल बताए गए हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ अभ्यर्थियों ने इन प्रमाणपत्रों के आधार पर आरक्षण का लाभ प्राप्त किया, जबकि उनकी वास्तविक पात्रता और उत्तराखंड का निवासी होने को लेकर सवाल हैं। यह भी दावा किया गया कि कुछ अभ्यर्थियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि दूसरे राज्यों से जुड़ी है, इसके बावजूद उन्होंने स्वयं को उत्तराखंड का निवासी दर्शाया।

SIT कर रही मामले की जांच, संदिग्ध दस्तावेजों के सत्यापन के निर्देश

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने SIT के गठन की जानकारी दी। इसके बाद अदालत ने राजस्व सचिव को सभी संदिग्ध प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने के निर्देश देते हुए जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।

इस मामले में अब संदिग्ध प्रमाणपत्रों के सत्यापन और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, प्रमाणपत्रों के फर्जी होने और संबंधित अभ्यर्थियों की पात्रता को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!