
देहरादून: श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल एवं रोटरी क्लब देहरादून सेंट्रल के संयुक्त तत्वावधान में स्तन कैंसर जागरूकता दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्तन कैंसर की समय पर पहचान, नियमित जांच और उचित उपचार के महत्व पर जोर दिया। वहीं, स्तन कैंसर को मात दे चुकी महिलाओं ने अपने साहस और सकारात्मक सोच से दूसरों को प्रेरित किया।
कार्यक्रम का आयोजन अस्पताल के चेयरमैन पूज्य श्री महंत देवेन्द्र दास जी महाराज के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन तथा रोटरी क्लब देहरादून सेंट्रल की अध्यक्ष रोटेरियन एडवोकेट अंजना साहनी के सहयोग से किया गया। उल्लेखनीय है कि अंजना साहनी स्वयं भी स्तन कैंसर विजेता हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक करना, समय पर जांच और उपचार के प्रति प्रेरित करना तथा बीमारी को मात देने वाली महिलाओं के संघर्ष और साहस को सम्मान देना रहा।

रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मीनू गुप्ता ने कहा कि स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों की समय रहते पहचान होने पर उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बीमारी के गंभीर अवस्था में पहुंचने और उपचार पर होने वाले आर्थिक बोझ को भी कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि यदि स्तन में कोई बदलाव कई सप्ताह तक बना रहता है, तो उसे नजरअंदाज न करें और चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें।
डॉ. कनिका कपूर ने नियमित जांच और मैमोग्राफी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय पर जांच से स्तन कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और किसी भी असामान्य बदलाव को गंभीरता से लेने का संदेश दिया।
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के निदेशक एवं ब्रेस्ट एंड एंडोक्राइन सर्जन प्रो. डॉ. नीलकमल ने स्तन कैंसर के उपचार के क्षेत्र में अपने 27 वर्षों के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान और उचित उपचार बेहतर परिणामों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने बताया कि अस्पताल का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों को अपने घर के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। अस्पताल में स्तन कैंसर के उपचार के लिए विभिन्न विशेषज्ञों की संयुक्त सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से पात्र मरीजों को रियायती उपचार की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
प्रो. डॉ. नीलकमल ने कहा कि कैंसर के उपचार के साथ मरीजों का पुनर्वास भी बेहद महत्वपूर्ण है। संस्थान का प्रयास है कि कैंसर से उबरने वाले मरीज आत्मसम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल हों और स्वस्थ, सार्थक एवं उत्पादक जीवन जी सकें।
कार्यक्रम में पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सीमा आचार्य, एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. निशीथ गोविल तथा राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह भी उपस्थित रहे। उनकी सहभागिता ने कैंसर की बेहतर देखभाल में विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं के बीच समन्वय के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण स्तन कैंसर विजेताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ और रोटरी क्लब के सदस्यों ने संगीतमय प्रस्तुतियां दीं। कैंसर जागरूकता से जुड़े संदेशों, गीत-संगीत और उपहार वितरण के माध्यम से बीमारी को मात देने वाली महिलाओं के साहस, संघर्ष और सकारात्मक सोच का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर प्रो. डॉ. पंकज गर्ग, डॉ. अजीत तिवारी, डॉ. पल्लवी कौल, डॉ. देबांजन सिकदर और डॉ. निशांत सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के चिकित्सक एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. रचित आहूजा रहे।
समापन अवसर पर डॉ. देबांजन सिकदर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल अतिथियों, रोटरी क्लब के सदस्यों, अस्पताल प्रशासन, नर्सिंग स्टाफ, स्वयंसेवकों और कैंसर विजेताओं के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से संदेश दिया गया कि स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच, शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर चिकित्सकीय सलाह के लिए लगातार जागरूक करना आवश्यक है।
स्तन कैंसर के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता, समय पर जांच और उचित उपचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शुरुआती पहचान से उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है।












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