पब्बर नदी में छोड़ा गया पानी बना काल, ढाई वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत

त्यूणी/देहरादून। रिपोर्ट: नीरज उत्तराखंडी….
उत्तराखंड के देहरादून जनपद की त्यूणी तहसील में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। सावड़ा-कुड्डू जलविद्युत परियोजना से अचानक छोड़े गए पानी के कारण पब्बर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिसकी चपेट में आकर ढाई वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और परियोजना प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मृतक बच्ची की पहचान सरनाड बस्ती निवासी मरसिका के रूप में हुई है। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

नदी किनारे खेल रहे थे बच्चे, अचानक बढ़ा जलस्तर

जानकारी के अनुसार गुरुवार दोपहर गुतियाखाटल बाजार के पास स्थित सरनाड बस्ती के तीन छोटे बच्चे पब्बर नदी किनारे रेत में खेल रहे थे। इनमें दो बच्चे करीब पांच वर्ष के थे, जबकि मरसिका की उम्र लगभग ढाई वर्ष बताई जा रही है।

इसी दौरान सावड़ा-कुड्डू जलविद्युत परियोजना से नदी में अचानक पानी छोड़ा गया, जिससे पब्बर नदी का जलस्तर कुछ ही मिनटों में तेजी से बढ़ गया। अचानक आए तेज बहाव को देखकर दो बड़े बच्चे किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल आए, लेकिन छोटी बच्ची पानी की चपेट में आकर बह गई।

चार घंटे बाद मिला मासूम का शव

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर सर्च अभियान शुरू किया। जलस्तर कम होने के बाद नदी में तलाशी अभियान चलाया गया। करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मासूम बच्ची का शव बरामद किया गया।

हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और स्थानीय लोग बेहद आक्रोशित हैं।

मजदूरी पर गया था पिता, मां दुकान गई थी

पुलिस के मुताबिक घटना के समय बच्ची का पिता मजदूरी के लिए बाहर गया हुआ था, जबकि मां किसी काम से दुकान गई थी। बच्चों को पड़ोस की एक महिला की निगरानी में छोड़ा गया था। खेलते-खेलते बच्चे नदी किनारे पहुंच गए और यह दर्दनाक हादसा हो गया।

सायरन बजा था या नहीं? जांच का बड़ा मुद्दा

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जलविद्युत परियोजना की ओर से पानी छोड़ने से पहले चेतावनी सायरन बजाया गया था या नहीं।

स्थानीय लोगों के बयान इस मामले में अलग-अलग सामने आए हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि सायरन बजाया गया था, जबकि कई लोगों ने दावा किया कि उन्हें किसी भी प्रकार की चेतावनी सुनाई नहीं दी। क्षेत्र में सायरन सिस्टम मौजूद होने की बात कही जा रही है, लेकिन उसके सही संचालन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।

पुलिस ने परियोजना प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट

थाना प्रभारी अश्वनी बलूनी ने बताया कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस ने हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन से घटना के समय पानी छोड़े जाने, सायरन संचालन और सुरक्षा प्रोटोकॉल से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने परियोजना प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी किनारे बसे गांवों और बस्तियों को समय रहते पर्याप्त सूचना नहीं दी जाती, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी चेतावनी प्रणाली लागू की जाए और पानी छोड़े जाने से पहले स्पष्ट एवं समयबद्ध अलर्ट जारी किया जाए।

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