नई दिल्ली: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग से जुड़ी गतिविधियां तेज हो गई हैं। आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स और अन्य हितधारकों से बातचीत कर उनकी मांगों और सुझावों को समझ रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम बेसिक पे, पेंशन रिवीजन, डीए मर्जर और एरियर्स जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं।
हालांकि, अभी तक आयोग की ओर से नए वेतन ढांचे या फिटमेंट फैक्टर का कोई अंतिम आंकड़ा घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में सामने आ रहे संभावित आंकड़ों को फिलहाल आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता।
8वें वेतन आयोग का गठन कब हुआ?
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग में प्रोफेसर पुलक घोष और पंकज जैन सदस्य के तौर पर शामिल हैं।
आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस समयसीमा के आधार पर आयोग की रिपोर्ट 2027 में सरकार को सौंपी जा सकती है। इसके बाद सरकार आयोग की सिफारिशों पर निर्णय लेगी।
बेंगलुरु और मुंबई में होंगी अहम बैठकें
कर्मचारियों और पेंशनर्स से सुझाव लेने के लिए आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकें कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सितंबर में पुडुचेरी और चंडीगढ़ में बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
अब आगामी बैठकों में बेंगलुरु और मुंबई महत्वपूर्ण हैं। बेंगलुरु में आयोग की बैठक 7 और 8 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है, जबकि मुंबई में 22 और 23 अक्टूबर 2026 को हितधारकों के साथ चर्चा होगी।
मुंबई बैठक में शामिल होने के इच्छुक कर्मचारी संगठनों को नियुक्ति/बैठक के लिए 10 अक्टूबर 2026 तक आवेदन करना होगा।
फिटमेंट फैक्टर पर सबसे ज्यादा नजर
8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है। फिलहाल आयोग ने फिटमेंट फैक्टर के संबंध में कोई अंतिम संख्या घोषित नहीं की है।
कुछ कर्मचारी संगठनों की ओर से 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखे जाने की बात सामने आई है। वहीं, NC-JCM की स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज की ओर से 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग का उल्लेख किया गया है।
यानी अभी अलग-अलग संगठनों की मांगें सामने हैं, लेकिन अंतिम फिटमेंट फैक्टर कितना होगा, इसका फैसला आयोग की सिफारिश और उसके बाद सरकार के निर्णय से ही स्पष्ट होगा।
₹18 हजार की बेसिक पे कितनी हो सकती है?
7वें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 प्रति माह है।
सिर्फ उदाहरण के तौर पर यदि 3.00 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो ₹18,000 की मौजूदा बेसिक पे गणना के आधार पर ₹54,000 हो जाएगी। इसी तरह 3.833 या 4.00 जैसे फैक्टर पर अलग-अलग गणनाएं सामने आती रही हैं।
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि ₹54,000, ₹69,000 या ₹72,000 जैसी रकम फिलहाल संभावित गणना हैं, 8वें वेतन आयोग द्वारा घोषित नई न्यूनतम बेसिक पे नहीं। अंतिम वेतन संरचना आयोग की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगी।
पेंशनर्स के लिए भी बड़ा फैसला
8वां वेतन आयोग केवल कार्यरत केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन से जुड़ा विषय नहीं है। इसका असर पेंशनर्स से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है।
पेंशन रिवीजन किस फॉर्मूले से होगा और मौजूदा पेंशनर्स को इसका लाभ किस तरह मिलेगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
इसी तरह डीए को बेसिक पे में मर्ज करने को लेकर भी फिलहाल कोई अंतिम सरकारी फैसला सामने नहीं आया है।
1 जनवरी 2026 से लागू होगा नया वेतन?
कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच यह सवाल भी लगातार चर्चा में है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होंगी या नहीं।
फिलहाल सरकार की ओर से प्रभावी तारीख को लेकर अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। इसलिए 1 जनवरी 2026 से लागू होने की बात को अभी निश्चित नहीं माना जा सकता।
यदि सरकार भविष्य में इस तारीख को प्रभावी तारीख के तौर पर मंजूरी देती है, तो लागू होने की तारीख और वास्तविक भुगतान के बीच की अवधि के बकाये यानी एरियर्स का सवाल भी सामने आएगा। हालांकि, एरियर का भुगतान होगा या नहीं, कितना होगा और किस तरीके से होगा—इस पर भी अंतिम निर्णय सरकार की ओर से ही स्पष्ट किया जाएगा।
अभी कर्मचारियों को किस बात का इंतजार?
फिलहाल 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया जारी है और कर्मचारी संगठनों की मांगों पर विचार-विमर्श हो रहा है। ऐसे में फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम बेसिक पे, पेंशन रिवीजन, डीए मर्जर और एरियर को लेकर अंतिम तस्वीर आयोग की रिपोर्ट और केंद्र सरकार के फैसले के बाद ही सामने आएगी।
इसलिए अभी सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी निश्चित वेतन या फिटमेंट फैक्टर के आंकड़े को सरकारी घोषणा मानकर चलना सही नहीं होगा।














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