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जिंदा व्यक्ति की ‘मौत’ का फर्जी खेल! जमीन अपने नाम कराने को वसीयत से लेकर श्मशान की रसीद तक फर्जी

देहरादून: जमीन के फर्जीवाड़े से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि जमीन पर कब्जे और राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने के लिए एक जीवित व्यक्ति को कागजों में मृत दिखा दिया गया। इतना ही नहीं, उसकी कथित मौत और अंतिम संस्कार से जुड़ी फर्जी रसीद तक तैयार कर दी गई। मामले में पुलिस ने एक प्रतिष्ठित कॉलेज के मालिक के बेटे, उसकी मां समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

प्रेमनगर थाना क्षेत्र से सामने आए इस मामले में पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू की है। शिकायतकर्ता श्यामलाल, निवासी सिमलासग्रांट डोईवाला, ने आरोप लगाया है कि उनके पिता ताराचंद की जमीन को हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया।

शिकायत के अनुसार, वर्ष 1995 में ताराचंद के नाम से कथित तौर पर फर्जी वसीयत तैयार की गई। इसके बाद उन्हें वर्ष 2002 में मृत दर्शाते हुए उनकी मौत और अंतिम संस्कार से संबंधित दस्तावेज भी तैयार किए गए। आरोप है कि इसी आधार पर जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में आरोपियों के पक्ष में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया कराई गई।

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि दस्तावेजों में ताराचंद की मृत्यु 14 जून 2002 दिखाई गई, जबकि शिकायतकर्ता के मुताबिक उनकी वास्तविक मृत्यु 20 नवंबर 2016 को हुई थी। ग्राम पंचायत सिमलासग्रांट से ताराचंद का वास्तविक मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हुआ है।

आरोप है कि फर्जी वसीयत, कथित फर्जी श्मशान घाट की रसीद और अन्य दस्तावेजों के आधार पर ईस्ट हॉप टाउन स्थित करीब 0.4050 हेक्टेयर भूमि के राजस्व अभिलेखों में आरोपियों के पक्ष में प्रविष्टियां दर्ज कराई गईं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया से ताराचंद के कानूनी वारिसों को आर्थिक नुकसान हुआ और आरोपियों को अनुचित लाभ पहुंचा।

पुलिस ने मामले में संजय कुमार चौधरी, ओमवती और चंद्रावती के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। प्रेमनगर थाना पुलिस के मुताबिक, श्यामलाल की शिकायत के आधार पर मुकदमा अपराध संख्या 216/2026 दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

प्रेमनगर थाना प्रभारी गिरीश नेगी ने बताया कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित फर्जी वसीयत, मृत्यु संबंधी दस्तावेज और श्मशान घाट की रसीद कैसे तैयार हुई और राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया किस तरह हुई।

 

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