Advertisement

मच्छर भगाने वाले धुएं पर बड़ा सवाल! क्या अस्थमा और फेफड़ों के मरीजों के लिए है खतरा?

Mosquito Fogging Smoke Health Risk: बारिश के मौसम में मच्छरों से बचाव के लिए नगर निकायों की ओर से फॉगिंग और कीटनाशक का छिड़काव किया जाता है। लेकिन तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के अन्नूर में मच्छर भगाने वाली दवा के धुएं के बीच दो लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की जांच में दोनों मौतों को धुएं से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।

दो लोगों की मौत के बाद इलाके में बढ़ी चिंता

अन्नूर क्षेत्र में एक ही दिन के आसपास 65 वर्षीय ऑटो चालक मोहन और 75 वर्षीय प्रेमा उर्फ रानी की मौत हुई। इसके बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा शुरू हुई कि कहीं मच्छर भगाने वाली दवा के घने धुएं का उनकी तबीयत पर असर तो नहीं पड़ा।

मोहन और प्रेमा दोनों की तबीयत पहले से खराब बताई गई थी। परिवारों की ओर से इन मौतों को लेकर पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। बाद में स्वास्थ्य विभाग और नगर पंचायत के अधिकारियों ने मामले की जांच की।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्या सामने आया?

जांच अधिकारियों के मुताबिक, दोनों मृतकों को पहले से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मोहन को लिवर फेलियर की समस्या थी और उनके फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने का भी इलाज चल रहा था।

वहीं प्रेमा उर्फ रानी को COPD (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) और अस्थमा की समस्या थी। उनकी हालत गंभीर थी और वह घर पर CPAP वेंटिलेटर की सहायता ले रही थीं।

अधिकारियों का कहना है कि मच्छर भगाने वाली दवा का छिड़काव सड़क पर किया गया था। जांच में कीटनाशक की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाए जाने की बात भी सामने नहीं आई। अधिकारियों के अनुसार, दवा की वैधता अगस्त 2027 तक थी।

क्या फॉगिंग का धुआं घर के अंदर जाना खतरनाक हो सकता है?

मच्छर नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉगिंग धुएं में अलग-अलग प्रकार के कीटनाशक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ परिस्थितियों में इस धुएं की अधिक मात्रा में सांस के जरिए शरीर में जाने से परेशानी हो सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अस्थमा, COPD या अन्य फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों, बुजुर्गों और कुछ अन्य संवेदनशील लोगों को ऐसे धुएं से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अधिक मात्रा में धुएं के संपर्क में आने से सिरदर्द, कंपकंपी और सांस से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य परिस्थितियों में फॉगिंग का धुआं जानलेवा है। इस मामले में भी स्वास्थ्य विभाग ने दोनों मौतों को फॉगिंग से होने की पुष्टि नहीं की है।

फॉगिंग के दौरान किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों को पहले से सांस संबंधी बीमारी है, उन्हें फॉगिंग के दौरान विशेष सावधानी रखनी चाहिए। खासकर:

  • अस्थमा के मरीज
  • COPD या अन्य फेफड़ों की बीमारी वाले लोग
  • बुजुर्ग
  • छोटे बच्चे
  • गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज
  • जिन लोगों को धुएं से एलर्जी या सांस लेने में परेशानी होती है

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बार-बार धुएं के संपर्क में आने से कुछ लोगों में सांस संबंधी लक्षण बढ़ सकते हैं।

मच्छर भगाने वाली दवा के धुएं से बचने के लिए क्या करें?

फॉगिंग के दौरान कुछ आसान सावधानियां अपनाकर धुएं के संपर्क को कम किया जा सकता है।

1. दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें
घर के बाहर फॉगिंग होने पर दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने की सलाह दी जाती है।

2. बच्चों को कुछ समय के लिए घर के अंदर रखें
फॉगिंग के दौरान बच्चों को बाहर खेलने न भेजें। सामग्री के अनुसार, करीब आधे घंटे बाद उन्हें बाहर भेजना बेहतर माना गया है।

3. खाने-पीने की चीजें ढककर रखें
फॉगिंग से पहले खाद्य पदार्थों और पानी को अच्छी तरह ढक दें।

4. धुएं के बीच बाहर न घूमें
फॉगिंग के दौरान सड़क पर अनावश्यक रूप से घूमने से बचें।

5. सांस की बीमारी वाले मरीज विशेष सावधानी बरतें
अस्थमा या दूसरी फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को फॉगिंग के धुएं से जितना संभव हो उतना दूर रहना चाहिए।

फॉगिंग को लेकर क्या है निष्कर्ष?

अन्नूर में हुई दो मौतों के मामले में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की जांच ने मच्छर भगाने वाली दवा के धुएं को मौत का कारण नहीं माना है। दोनों मृतकों को पहले से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं और अधिकारियों ने दोनों घटनाओं को फॉगिंग से सीधे जोड़ने से इनकार किया है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कीटनाशक वाले धुएं का अधिक मात्रा में संपर्क विशेष रूप से सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए फॉगिंग के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है।

निष्कर्ष: मच्छरों से बचाव के लिए फॉगिंग एक सामान्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय है, लेकिन इसका इस्तेमाल निर्धारित तरीके और सुरक्षा सावधानियों के साथ किया जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को धुएं के संपर्क के बाद सांस लेने में गंभीर परेशानी, चक्कर या अन्य चिंताजनक लक्षण महसूस हों तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!