जीबी पंत इंजीनियरिंग संस्थान भर्ती घोटाला: हाईकोर्ट से राहत नहीं, अब कोर्ट ने भेजा समन

पौड़ी स्थित जीबी पंत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, घुड़दौड़ी में वर्ष 2019 में हुई नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) पौड़ी की अदालत ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने संस्थान के वर्तमान कुलसचिव, पूर्व निदेशक समेत चार आरोपियों के खिलाफ समन जारी करते हुए उन्हें अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

एसआईटी (SIT) द्वारा विस्तृत जांच के बाद अदालत में 2,000 से अधिक पन्नों का आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल किया गया था, जिस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने यह कार्रवाई की है।

2019 की 45 नियुक्तियों पर उठे थे सवाल

संस्थान प्रशासन ने वर्ष 2019 में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और कुलसचिव सहित कुल 45 पदों पर नियुक्तियां की थीं। बाद में इन नियुक्तियों की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे। विभागीय जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद संस्थान प्रशासन ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया।

दो एफआईआर के बाद बनी थी एसआईटी

इस मामले में पहली एफआईआर तत्कालीन कुलसचिव डॉ. संजीव नैथानी की शिकायत पर 30 अक्टूबर 2021 को कोतवाली पौड़ी में दर्ज हुई थी। इसके बाद तत्कालीन निदेशक प्रो. वाई. सिंह ने 26 नवंबर 2022 को दूसरी एफआईआर दर्ज कराई।

इसी बीच उत्तराखंड शासन ने नवंबर 2021 में एसएसपी पौड़ी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर पूरे मामले की जांच सौंप दी। जांच पूरी होने के बाद एसआईटी ने अदालत में विस्तृत आरोप पत्र प्रस्तुत किया।

इन चार आरोपियों को जारी हुआ समन

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शहजाद ए. वाहिद की अदालत ने आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए निम्नलिखित आरोपियों को समन जारी किया है—

  • कुलसचिव संदीप कुमार
  • पूर्व निदेशक प्रो. एमपीएस चौहान
  • असिस्टेंट प्रोफेसर लोकेश कुमार
  • मनोज पाठक

यदि निर्धारित तिथि पर आरोपी अदालत में आत्मसमर्पण या पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने की संभावना भी बन सकती है।

हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है याचिका

मामले के आरोपी एवं संस्थान के कुलसचिव संदीप कुमार ने भर्ती अनियमितता से संबंधित मुकदमा रद्द करने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद अब निचली अदालत में मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है।

 

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