देहरादून। नीट-यूजी 2025 में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस दाखिले के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। देहरादून में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने दो और आरोपितों संजय कुमार और गिरीश सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों पर तीन अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेज, आधार कार्ड, मूल निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराने में सहयोग करने का आरोप है।
इसी बीच एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने सत्यापन में फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर 12 और अभ्यर्थियों का एमबीबीएस सीट आवंटन निरस्त कर दिया है। इससे पहले तीन सीटों का आवंटन रद्द किया जा चुका था। इस तरह नीट-यूजी 2025 के राज्य कोटे में अब तक कुल 15 एमबीबीएस सीटों का आवंटन निरस्त किया जा चुका है।
पुलिस के अनुसार संजय कुमार और गिरीश सिंह एक-दूसरे के पुराने परिचित हैं और वर्ष 2007 से एक-दूसरे को जानते हैं। जांच में आरोप है कि दोनों ने स्वाति, परी और खुशी के नाम से कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने में सहयोग किया। इनमें आधार कार्ड, मूल निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र शामिल बताए गए हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने में मदद करने और इसके बदले अनुचित धनराशि लेने का आरोप है।
मामले की जांच की शुरुआत 13 सितंबर को थाना रायपुर और थाना क्लेमेनटाउन में दर्ज मुकदमों से हुई थी। ‘अपणी सरकार’ पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के लिए किए गए आवेदनों की जांच के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद रायपुर में मुकदमा अपराध संख्या 380/26 और क्लेमेनटाउन में मुकदमा अपराध संख्या 86/26 दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की। टीम ने संबंधित दस्तावेजों और मेडिकल शिक्षण संस्थानों के रिकॉर्ड की जांच की। इस दौरान कुछ अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। शिक्षण संस्थानों से मिले रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई गई और आगे की जांच में संजय कुमार तथा गिरीश सिंह की भूमिका सामने आई। पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया।
इन दोनों से पहले एसआईटी रुपेश पंडित, अरविंद कुमार और धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर चुकी है। इस तरह देहरादून में दर्ज दोनों मुकदमों में अब तक पांच आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से लेकर प्रमाणपत्र बनवाने और इनके आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने तक की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।
उधर, एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने जिलों से प्राप्त प्रमाणपत्र सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर 12 और अभ्यर्थियों का एमबीबीएस सीट आवंटन निरस्त किया है। ये मामले ऊधमसिंह नगर जिले से जुड़े हैं। संबंधित अभ्यर्थियों ने स्थायी निवास, जाति और अन्य प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस सीट हासिल की थी।
विश्वविद्यालय ने नीट-यूजी काउंसलिंग से संबंधित 778 प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए जिलों को भेजे थे। जिला स्तर से प्राप्त रिपोर्ट में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद संबंधित सीटों का आवंटन निरस्त किया गया। निरस्त सीटें हल्द्वानी, श्रीनगर, हरिद्वार, अल्मोड़ा और देहरादून के मेडिकल कॉलेजों में आवंटित थीं। इनमें 10 अभ्यर्थी दाखिला ले चुके थे, एक ने दाखिला नहीं लिया था, जबकि एक अभ्यर्थी दाखिले के बाद सीट छोड़ चुकी थी। निरस्त सीटों को आगामी काउंसलिंग में रिक्त माना जाएगा।
निरस्त सीटों वाले 12 अभ्यर्थियों में अनुराग भोजवाल, दीक्षा कुमारी, अलसामी फाजिल, चित्रा, प्रियांशु गुप्ता, वैष्णवी सिंह, प्रभात चौधरी, आवंतिका डवास, वैनवी कुमार, दक्ष चतुर्वेदी, काजल भारद्वाज और दीपांशु के नाम शामिल हैं। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल के अनुसार जिलों से प्रमाणपत्रों के सत्यापन की रिपोर्ट लगातार प्राप्त हो रही है और फर्जी प्रमाणपत्र मिलने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच ऊधमसिंह नगर जिले में भी व्यापक स्तर पर चल रही है। 28 सितंबर तक उपलब्ध प्रशासनिक और पुलिस अपडेट के अनुसार जिले में 30 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने की जानकारी है। वहीं अलग-अलग मामलों और नामों को मिलाकर यह संख्या 34 तक बताई जा रही है। जिले में कम से कम सात आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
बाजपुर में मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए कथित फर्जी स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्र तैयार कराने के मामले में नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इनमें मो. आलम, श्याम बिहारी भोजवाल, शिवम माथुर, अर्चना, रोहित, हरपाल, अनुराग भोजवाल, दीक्षा और चित्रा के नाम शामिल हैं। पुलिस ने मो. आलम, श्याम बिहारी भोजवाल, शिवम माथुर, अर्चना और रोहित को गिरफ्तार किया है।
जांच के दौरान चित्रा, अनुराग भोजवाल, दीक्षा और रिया सिंह के नाम से जारी प्रमाणपत्रों में अनियमितता सामने आने की बात कही गई है। पूछताछ में मो. आलम ने दीक्षा और चित्रा के प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पांच हजार रुपये मिलने की बात बताई। वहीं अनुराग भोजवाल के पिता श्याम बिहारी भोजवाल ने कथित तौर पर बेटे के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में बरेली निवासी हरपाल को 50 हजार रुपये देने की बात कही। मामले में शिवम माथुर, रोहित और अर्चना की भूमिका की भी जांच की गई।
जांच में फर्जी किरायेदार सत्यापन कराने के आरोप भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपितों के मोबाइल फोन से कूटरचित दस्तावेजों से संबंधित साक्ष्य मिले हैं और छह मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।
बाजपुर में ही अलसामी फाजिल, उसके पिता तौफिक अहमद और महेशपुरा निवासी रवि के खिलाफ अलग मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच में अलसामी के नाम से जारी जाति प्रमाणपत्र के साथ लगाए गए गृहकर प्रमाणपत्र और रसीद के कूटरचित होने का आरोप है। नगर पालिका के रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेज का रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात सामने आई है। अलसामी फाजिल का नाम विश्वविद्यालय की ओर से निरस्त की गई 12 एमबीबीएस सीटों की सूची में भी शामिल है।
गदरपुर में 25 सितंबर को राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार की तहरीर पर 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इनमें शुभम हुड़िया, निखिल वर्मा, प्रमोद सैनी, शेखर अरोड़ा, लवी, प्रियांशु गुप्ता, वैष्णवी सिंह, आवंतिका डवास, वनवी कुमारी और प्रभात चौधरी के नाम शामिल हैं। जांच में पांच छात्रों से जुड़े प्रमाणपत्रों में कथित फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड, खतौनी, परिवार रजिस्टर और बिजली बिल समेत अन्य दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात सामने आई।
पुलिस ने शुभम हुड़िया और निखिल वर्मा को गिरफ्तार किया है। दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक हार्ड डिस्क और एक एसएसडी बरामद करने की जानकारी दी है। मोबाइल से मिली रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है।
रुद्रपुर में भी राजस्व उपनिरीक्षक की तहरीर पर दीपांशु, दक्ष चतुर्वेदी और शुभम हुड़िया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यहां जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों के लिए लगाए गए दस्तावेजों में अनियमितता की जांच की जा रही है।
फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण में राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई है। देहरादून में जगदीश राठौड़ और डिंपल को निलंबित किया गया है। वहीं ऊधमसिंह नगर में बाजपुर के राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद अजमल खान और गदरपुर के राजस्व उपनिरीक्षक सरताज अली के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। प्रमाणपत्र जारी करने और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में प्रथमदृष्टया अनियमितता या लापरवाही सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।
इस पूरे प्रकरण में देहरादून में अब तक पांच गिरफ्तारियां, ऊधमसिंह नगर में कम से कम सात गिरफ्तारियां और नीट-यूजी 2025 के राज्य कोटे की 15 एमबीबीएस सीटों का आवंटन निरस्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऊधमसिंह नगर में 30 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने का प्रशासनिक-पुलिस आंकड़ा भी उपलब्ध है, जबकि विभिन्न मामलों को मिलाकर आरोपितों की संख्या 34 बताई जा रही है। जांच एजेंसियां फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने, सत्यापन प्रक्रिया और दाखिले से जुड़ी पूरी कड़ी की जांच कर रही हैं। आगे नए तथ्य सामने आने पर अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है।












Leave a Reply