रक्तदान के बाद नेत्रदान भी मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक माना जाता है।
कोटद्वार के 89 वर्षीय निवासी स्वर्गीय रघुवीर शरण अग्रवाल के निधन के बाद उनके परिवार ने एक मिसाल पेश की है।
परिजनों के अनुसार, स्व. अग्रवाल के पुत्र मनोज कुमार अग्रवाल ने अपने पिता की आंखें दान करने का निर्णय लिया। इस संबंध में उन्होंने निर्मल आश्रम नेत्र संस्थान से संपर्क किया, जिसके बाद संस्थान की टीम कोटद्वार पहुंची और स्व. अग्रवाल के निवास से कॉर्निया प्राप्त किए।
स्व. रघुवीर शरण अग्रवाल के नेत्रदान से अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिल सकेगी। इस पुनीत कार्य की स्थानीय लोगों और संस्थान प्रशासन ने सराहना की है।
परिवार की इस सेवा भावना ने समाज को भी नेत्रदान के प्रति जागरूक और प्रेरित करने का कार्य किया है।
भले ही रघुवीर शरण अग्रवाल आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखें अब किसी और की आंखों से यह दुनिया देख सकेंगी।












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